सोनभद्र। तापमान में गिरावट और कोहरे के साथ हवा में प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार दिनों में अनपरा-सिंगरौली क्षेत्र की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है। सोमवार को सिंगरौली परिक्षेत्र (अनपरा-सिंगरौली) का एक्यूआई 328 दर्ज किया गया। आईक्यू एयर वेबसाइट पर अनपरा-शक्तिनगर क्षेत्र की वायु गुणवत्ता 250 के आसपास बनी रही। प्रदूषण के चलते सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। बच्चों और बुजुर्ग के लिए भी यह खतरनाक है।
मौसम में अब तेजी से बदलाव हो रहा है। तापमान में गिरावट के साथ वातावरण में आर्द्रता बढ़ रही है तो रात में घने कोहरे की चादर तन जाती है। सुबह देर तक कोहरा छाया रहता है। मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। कोयला व तापीय परियोजनाओं वाले अनपरा-शक्तिनगर क्षेत्र को अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में सूचीबद्ध किया गया है।
यहां वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यूपी-एमपी सीमा पर संयंत्र लगाए गए हैं। इसकी दैनिक रिपोर्ट भी सिंगरौली परिक्षेत्र के रूप में जारी की जाती है। सीपीसीबी की ओर से जारी दैनिक आंकड़ों के मुताबिक सिंगरौली परिक्षेत्र (अनपरा-सिंगरौली) में एक्यूआई 20 नवंबर को 150 से नीचे था।
इसके बाद कोहरे का असर बढ़ने से यह 21 नवंबर को 225 तक पहुंच गया। अगले दिन 22 को 245 और 23 नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक 262 दर्ज किया गया। 24 नवंबर को एक्यूआई 328 तक पहुंच गया। इसमें भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रदूषण के छोटे कणों का घनत्व अधिक पाया गया।
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रॉबर्ट्सगंज, ओबरा में भी स्थिति अच्छी नहीं
आईक्यू एयर वेबसाइट के आंकड़ाें पर गौर करें तो रॉबर्ट्सगंज और ओबरा में भी हालात अच्छे नहीं है। मंगलवार को रॉबर्ट्सगंज में वायु गुणवत्ता सूचकांक 169 और ओबरा में 159 दर्ज किया गया। इस स्तर को स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता है। खास तौर से बच्चों, बुजुर्गों और उस तबके के लिए जो पहले ही सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं।
अस्पताल आने वाले हर 10 में से 3 मरीज सांस के
संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज के अधीक्षक डॉ. रवि प्रताप सिंह के मुताबिक मौसम में बदलाव के कारण सांस के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। अस्पताल आने वाले हर 10 में से 3 मरीज सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। हालांकि ठंड बढ़ने के साथ इनकी संख्या और बढ़ सकती है। बताया कि सर्दी में नमी और कोहरे के चलते प्रदूषण के कण ऊपर नहीं जा पाते। वह वातावरण में ही एक ऊंचाई पर घूमते रहते हैं। सांस के जरिए यह कण फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे समय में संवेदनशील रहने की जरूरत है।
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ये सावधानी बरतें
0 घर के बाहर मास्क लगाकर ही निकलें।
0 सुबह कोहरे के बीच टहलने से बचें।
0 समय-समय पर भाप लेते रहें और गुनगुना पानी पीएं।
0 स्वस्थ आहार लें। इसमें मौसमी फल, सब्जियां शामिल कर सकते हैं।
0 इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी वाला दूध पीएं।
0 खांसी, सांस लेने में परेशानी, आंखों में खुजली जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।