आखिरकार एक हजार मेगावाट वाली अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई को शुक्रवार की रात लाइटअप (ऊर्जीकृत) करने में भेल एवं निगम अधिकारियों को सफलता मिल ही गई। अब इसे उत्पादन पर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रविवार रात तक इस इकाई से उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद है।
31 मार्च को सीएम अखिलेश यादव के हाथों लोकार्पण के समय से ही इकाई को नियमित उत्पादन पर लिए जाने की कवायद जारी है। 31 मार्च को दो घंटे तक उत्पादन लेने के साथ ही, बीच में भी कई बार इकाई को उत्पादन पर लिया गया। गत छह जून को 505 मेगावाट तक उत्पादन में मिली सफलता से निगम के अफसर झूम उठे थे लेकिन दो दिन बाद ही ब्वायलर में बड़ी दिक्कत ने सारी कवायदों को रोक दिया।
नए सिरे से ब्वायलर का काम दुरुस्त कर पांच अगस्त को इस इकाई को फिर से उत्पादन पर लिया गया लेकिन कुछ घंटों बाद ही टरबाइन में कंपन के चलते इकाई बंद कर दी गई। इस वाकए ने जहां भेल के दिल्ली स्थित दफ्तर में खलबली मचा दी, वहीं राज्य उत्पादन निगम के लिए भी इस इकाई को उत्पादन पर लेना चुनौती बन गया। पिछले दिनों एमडी की ओर से भेल को अल्टीमेटम भी जारी किया गया कि अगर 28 अगस्त तक इकाई को लाइटअप नहीं कर लिया जाता है तो निगम आगे से भेल को कोई भी काम न देने पर विचार कर सकता है।
इसके बाद तो भेल ने इस इकाई को उत्पादन पर लेने के लिए पूूरी ताकत झोंक दी। छह अगस्त से जहां दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम डेरा डाले हुए है, वहीं भेल के ईडी वीके बंसल भी दो महाप्रबंधकों को लेकर तीन दिन पूर्व अनपरा पहुंच गए। आखिरकार शुक्रवार की रात साढ़े नौ बजे इकाई को लाइटअप करने में सफलता मिली तो प्रोजेक्ट से जुड़े हर शख्स के चेहरे खिल उठे। अब इकाई को सफलतापूर्वक उत्पादन पर लेने के साथ ही, 14 दिन तक नियमित उत्पादन और इसके बाद कामर्शियल लोड पर लेने का काम शेष रह गया है, जिसको लेकर अब तक कोई न कोई बाधा मेहनत पर पानी फेरती रही है।
लेकिन इस बार कोई बाधा न आने पाए, इसके लिए भेल के ईडी के साथ ही विशेषज्ञों की टीम इकाई संचालन की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। उधर, अनपरा डी के सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी ने भी इकाई के लाइटअप होने की पुष्टि की। बताया कि रविवार रात तक इकाई को उत्पादन पर आ जाने की उम्मीद है।