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किशोरियों में खून की कमी

Thu, 14 Jul 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
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ऊर्जांचल सहित पूरे जिले में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग की अधिकांश किशोरियां (94.8 प्रतिशत) खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित है। यह खुलासा डब्ल्यूएचओ की ओर से वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे को लेकर जारी किए गए हालिया आंकड़ों से हुआ है। इसमें सूबे के 25 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में सोनभद्र को पांचवां स्थान दिया गया है। यह स्थिति तब है, जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जनपद को प्राथमिकता पर तो लिया ही गया है।
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एनजीटी के साथ ही शासन स्तर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी हैं।वर्ष 2004 के बाद वर्ष 2014 में किए गए सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पूर्वांचल में बलिया के बाद सोनभद्र ही एक ऐसा जनपद है, जहां इतनी बड़ी तादाद में किशोरियां खून की कमी से पीड़ित हैं। वहीं इस मामले में सूबे में हाई रिस्क (उच्च प्राथमिकता) जनपद के रूप में चयनित 25 जिलों की सर्वे रिपोर्ट पर नजर डालें तो श्रावस्ती, महाराजगंज, गोंडा, संत कबीरनगर के बाद सोनभद्र ही वह जनपद है, जहां सबसे ज्यादा संख्या में किशोरियां एनीमिया से पीड़ित चल रही हैं।

उधर, वात्सल्य संस्था की संचालक नीलम सिंह कहती हैं कि यह समस्या किसी एक जनपद की नहीं पूरे प्रदेश की है। सोनभद्र में तो हालात चिंताजनक हैं ही, सभी आयु वर्ष में खून की उपलब्धता की स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे प्रदेश में 80 प्रतिशत से अधिक लोग एनीमिया से ग्रसित हैं। इसके रोकथाम के लिए आयरन के गोली का समयानुसार सेवन के साथ ही सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार और बड़े पैमाने पर जागरूकता की जरूरत है।
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 वहीं यूनिसेफ की यूपी यूनिट के प्रोग्राम मैनेजर अमित मेहरोत्रा भी सोनभद्र से जुड़े आंकड़े की पुष्टि करते हैं। कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग से मिलकर एनीमिया पर अंकुश की योजना बनाई गई है। कोशिश है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, चिकित्सा सेंटरों और विद्यालयों के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा बच्चों, किशोरों-किशोरियों को प्रत्येक सप्ताह निर्धारित मात्रा वाली आयरन की गोली खिलाई जाए, ताकि इस समस्या पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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