सोन और कनहर नदी में बालू साइटों पर अमेठी और वीआईपी सिंडिकेट का दखल रहा है। जिले के तीन बालू ठेकेदार, खनिज विभाग और सिंडिकेट की मिलीभगत से बालू का खनन कराते आए हैं। ये बड़े व्यवसायी इन साइटों पर पोकलेन मशीन से लेकर कर्मचारी उपलब्ध कराते हैं।
पट्टा न होने के बावजूद सिंडिकेट और खनिज विभाग ने जब चाहा जहां चाहा बालू का अवैध खनन शुरू करा दिया। अमर उजाला में समय-समय पर बालू साइटों का खुलासा हुआ तो डीएम सीबी सिंह ने छापा डलवाकर इन साइटों पर कार्रवाई भी कराई थी। अब जब सोमवार को गायत्री प्रजापति की बर्खास्तगी की खबर आई तो सिंडिकेट के साथ ही उनके अपने और खनिज विभाग में खलबली मच गई है।
बर्खास्त खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के दाहिना हाथ माने जाने वाले पिंटू, विकास का सोनभद्र में दखल रहा है। दो वर्ष पूर्व दोनों का यहां पर आना-जाना लगा रहता था। अमर उजाला में जिले में अमेठी का दखल शीर्षक समाचार प्रकाशित हुआ तो इन लोगों का यहां आना-जाना कम हो गया। मगर लखनऊ से ही यहां पर नियंत्रण किए रखा। सिंडिकेट बदलने में भी इन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। पिछले एक साल से गायत्री के खास तिवारी का खनन बेल्ट में आगमन शुरू हुआ। सिंडिकेट, खनिज विभाग ने अवैध बालू साइटों पर 60-40 के रेशियो पर खनन शुरू कराया। अब जब बालू साइटों पर सोमवार को सख्ती बरती गई तो खलबली मच गई।
वीआईपी सिंडिकेट, खान विभाग, ओबरा थाना, चोपन थाना, डाला चौकी, राजस्व विभाग एवं वन विभाग के मजबूत गठजोड़ के चलते अवैध खनन का दायरा बढ़ता गया। वीआईपी टारगेट पूरा करने के चक्कर में खान विभाग और प्रशासनिक अमला सिंडिकेट के हाथ की कठपुतली बना रहा।
इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 26 अप्रैल 2016 को डेंजर जोन में पहुंच चुकी खदानों से प्रतिबंध हटा लिया गया। इनमें आराजी सं 4448 ग, 4450 फौजदार सिंह, आराजी सं 4585, 4586, 4596, 4597, 4599 खदानें डेंजर जोन में पहुंच चुकी थी। इसी तरह आराजी सं 7618 पूर्वांचल सेवा समिति सचिव अफरीना खान पत्नी इश्तियाक खान के खदान में अवैध खनन में कार्रवाई हो चुकी है। इसी तरह 4920, 4921, 4922 में भी हादसे हो चुके हैं। बावजूद इन खदानों को सुधारात्मक काम करने की इजाजत दे दी गई। प्रतिबंधित खदानों में काम शुरू तो हुआ मगर सुधारात्मक कार्य की आड़ में पत्थर का परिवहन होता रहा। यहां बताना जरूरी है। डेंजर जोन में पहुंच चुकी जिन खदानों से प्रतिबंध हटा था उनमें सिंडिकेट से जुड़े लोग, सपा नेता, बसपा नेता और अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल रहे।
जिले में बालू और पत्थर की खदानों में अवैध खनन का खेल लंबे समय से चल रहा है। खनन बेल्ट में हादसे भी होते आए हैं। मजदूरों की जान भी जाती है। लेकिन वीआईपी के भार से मजदूरों की चीख दबती आई है। एक वर्ष के भीतर बिल्ली मारकुंडी खनन बेल्ट में तीन हादसे हुए हैं। एक खदान में अवैध रूप से खनन होते मिला तो दूसरे खदान में अवैध रूप से बारूद के विस्फोट से आठ मजदूरों के चीथड़े उड़ गए थे। लीज संचालकों पर एफआईआर तो दर्ज हुई मगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
15 अक्तूबर 2015 को बिल्ली मारकुंडी के रासपहाड़ी में अराजी सं 5593 क में अवैध रूप से रखे गए बारूद में विस्फोट होने से आठ मजदूरों की मौत हो गई थी। मौजूदा खान अधिकारी राम प्रवेश सिंह (उस दौरान लखनऊ मुख्यालय अटैच थे) को शासन से इस मामले की जांच सौंपी गई। आरपी सिंह ने 14 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। आरपी सिंह ने 9वें बिंदु पर स्पष्ट लिखा था कि खनन बेल्ट में लीज से बढ़कर अवैध खनन हो रहा है। उन्होंने विस्तृत जांच कराए जाने की सिफारिश की थी।
आरपी सिंह ने बंद खदानों में भी खनन होने की आशंका से इंकार नहीं किया था। रिपोर्ट में यहां तक लिखा था कि प्रथमदृष्टया विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही दिखती है। बावजूद इसके खान अधिकारी, सर्वेयर, संबंधित थाने की पुलिस और वनकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।