महिला को एंबुलेंस से जाने के लिए आईडी भी जारी कर दी गई। इसके बाद जब एंबुलेंस से घर जाने के लिए चालक के पास पहुंचे तो चालक ने 500 रुपये किराया मांगा। परिजनों के पास रुपये कम थे। तो उन्होंने एंबुलेंस चालक से विनती की कि 300 रुपये ले लें और उन्हें कदरा पहुंचा दें, लेकिन एंबुलेंस चालक 500 रुपये की मांग करता रहा।
सिस्टम के तहत एंबुलेंस से कदरा जाने की आईडी जारी होने के बावजूद वह 300 रुपये में तैयार नहीं हुआ। इसके बाद एंबुलेंस न मिलने से लाचार महिला और उसके परिजन छोटे बच्चों के साथ 10 घंटे अस्पताल के महिला वार्ड के बाहर पड़े रहे। आखिरकार थक हार कर नसबंदी कराने वाली सितारा देवी ने अपनी चांदी का जेवर गिरवी रखने के लिए सास-ससुर को दिया।
घोरावल नगर के किसी आभूषण की दुकान पर चेन गिरवी रखकर ससुर ने 1500 रुपये लिए। इसके बाद लहरी ने एक पिकअप किराये पर ली और दोपहर करीब तीन बजे कदरा जाने के लिए रवाना हुई।
सीएचसी अधीक्षक (घोरावल) डॉ मुन्ना प्रसाद ने बताया कि चिकित्सकों की टीम के साथ रात भर और सुबह तक नसबंदी में जुटे रहे। नसबंदी कराने वाली महिला सितारा देवी को कदरा जाने के लिए आईडी भी जारी की गई थी। सितारा के ससुर लहरी और कुसुम्हा निवासी चंद्रभान सिंह पटेल ने प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की है। इस संबध में जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।