ऊर्जांचल से गुजरे राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग पर 24 घंटे उड़ने वाली धूल से राहत के लिए दिए गए निर्देश पर कोई कार्रवाई नही की गई। इससे लोगों को मार्ग पर आवागमन करने में परेशानी हो रही है। वहीं फेफड़े और पेट में धूल जाने से लोग श्वास एवं पाचन संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे है। महज अनपरा परिक्षेत्र में प्रतिवर्ष टीबी के 50 से 60 नए मरीज सामने आ रहे हैं।
अनपरा से गुजरे रीवां-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग और अनपरा से शक्तिनगर तक गए वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से हर दिन सैकड़ों वाहन कोयला एवं राख का परिवहन करते हैं। इसके चलते इस रोड पर छाए रहने वाली 24 घंटे धूल पर एनजीटी तक सख्त रूख अख्तियार कर चुकी है। इसको लेकर परियोजनावार पानी छिड़काव, सड़क-पटरियों की नियमित सफाई, सड़क-पटरियों के दुरुस्तीकरण जैसे एजेंडे तय कर, प्रशासन की तरफ से कई बैठकें की जा चुकी हैं। बावजूद हालात जस का तस हैं। काफी समय के बाद पानी छिड़काव शुरू हुआ लेकिन सही तरीके से नियमित साफ-सफाई न होने तथा गड्ढों का दायरा बढ़ने से फिसलन की स्थिति बनने लगी। इसे रोकने के लिए पानी छिड़काव बंद करा दिया गया लेकिन साफ-सफाई में सुधार नहीं हुआ। अनपरा स्थित संयुक्त चिकित्सालय के आंकड़े बताते हैं कि यहां प्रतिवर्ष महज टीबी के 50 से 60 नए मरीज पहुंच रहे हैं। त्वचा बदरंग होने, असमय बाल सफेद होने, पेट में दर्द, जलन, पाचन की दिक्कत, श्वांस फूलने, जकड़न जैसी दिक्कत आम बात बनने लगी है।