आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चयन में गड़बड़ी और धनउगाही की शिकायतें डीएम कार्यालय तक पहुंचने लगी हैं। वरीयता सूची जारी होने के बाद मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर कई अभ्यर्थियों ने गड़बड़ी और धनउगाही का आरोप लगाया।
एक अभ्यर्थी ने ऑडियो रिकार्डिंग भी सौंपा, जिसमें चयन के लिए डेढ़ लाख की व्यवस्था करने को कहा जा रहा है। आरोप है कि यह आवाज रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के सीडीपीओ का है। फिलहाल डीएम ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
जिले में 555 पदाें पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसमें से 530 पदों के लिए ही विभाग को ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद विभिन्न मापदंडों के आधार पर सोमवार को प्रथम और द्वितीय वरीयता वाले अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित की गई।
सूची प्रकाशन के बाद से ही गड़बड़ियों की शिकायतें शुरू हो गई हैं। अब तक चयन प्रक्रिया में दबी जुबान से ही धनउगाही की बातें जोरों पर थीं। मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अभ्यर्थियों ने न सिर्फ आरोप लगाए, बल्कि बातचीत से संबंधित कुछ ऑडियो क्लिप भी सौंपे।
आंगनबाड़ी केंद्र मारकुंडी-प्रथम से आवेदन करने वाली रेनू यादव ने बताया कि आवेदन में पंजीकृत मोबाइल नंबर पर दो मार्च को फोन कर शैक्षणिक योग्यता का सत्यापन कराने के लिए कहा गया। इसके बाद चार मार्च को काउंसिलिंग के लिए भी बुलाया गया।
बाद में उसे व्हाटसएप कॉल के जरिए 1.50 लाख रुपये की मांग की गई। पैसा न देने पर दूसरी वरीयता रखने वाली आवेदिका को प्राथमिकता देने को भी कहा गया। वहीं घोरावल के पिड़रिया गांव निवासी रुपा पटेल ने भी शिकायत पत्र में छह मार्च को सत्यापन कराने के बाद साजिश के तहत वरीयता सूची से बाहर करने का आरोप लगाया।
डीएम बद्रीनाथ सिंह के निर्देश पर अभ्यर्थियों ने सीडीओ कार्यालय पहुंचकर भी शिकायत दर्ज कराई। सीडीओ जागृति अवस्थी ने तत्काल जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीत सिंह से मामले की गंभीरता से जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। आश्वस्त किया कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
धनउगाही के आरोप बेबुनियाद हैं। मारकुंडी की रेनू यादव को सत्यापन के लिए जरूर बुलाया गया था, लेकिन वह निर्धारित मापदंडों के तहत वरीयता में नीचे थीं। वंचित होने के कारण ही ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
-सुभाष चंद्र मौर्य, सीडीपीओ रॉबर्ट्सगंज।
कार्यकर्ता चयन के लिए शासन ने मानक निर्धारित किए हैं। पहली वरीयता बीपीएल श्रेणी की निराश्रित, दूसरे नंबर पर इसी श्रेणी की परित्यक्त और फिर बीपीएल की अन्य महिलाओं को दिया जाना है। इस श्रेणी का लाभार्थी न होने पर इसी क्रम में एपीएल श्रेणी से चयन होना है। इसी मापदंड पर वरीयता सूची तैयार की गई है। प्रकाशित सूची पर जिसे आपत्ति है, वह दर्ज कराए। निस्तारण के बाद ही अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी।
-विनीत कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।