रेणुकूट/ओबरा। जलस्तर बढ़ने के बाद रिहंद और ओबरा बांध के खोले गए सभी गेट रविवार को बंद कर दिए गए। दोनों बांध पर स्थित पनबिजली परियोजना को पूरी क्षमता से संचालित किया जा रहा है। रिहंद बांध का जलस्तर रविवार की शाम तक 870 फीट के करीब रहा।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुशील कुमार सिंह ने बताया कि रविवार की सुबह पांच बजे रिहंद बांध के चार खुले फाटकों में से एक फाटक को बंद कर दिया गया था। सुबह छह बजे बांध का जलस्तर 870.1 फीट दर्ज किया गया था। 10 बजे बांध का जलस्तर 870 फीट पर पहुंचने के बाद बांध के खुले तीन अन्य फाटकों को भी बंद कर दिया गया। जल विद्युत परियोजना के अधिशासी अभियंता शशिकांत राय ने बताया कि बांध पर बनी 6 टरबाइन चलाकर 285 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे 17500 क्यूसेक पानी भी डिस्चार्ज हो रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल बांध का जलस्तर 870 फीट पर रुका हुआ है। यदि आगे बारिश होती है तो बांध के फाटक खोलने का निर्णय लिया जाएगा। इस वर्ष हुई अच्छी बारिश के कारण बांध के फाटक अब तक तीन बार खुल चुके हैं। दूसरी तरफ रिहंद में पानी कम आने से ओबरा बांध के जलस्तर पर भी दबाव कम होने हुआ है। इससे ओबरा बांध के भी खुले सभी चारों गेट रविवार की सुबह दस बजे बंद कर दिए गए। बांध का जलस्तर 192.75 मीटर पर स्थिर है। ओबरा जल विद्युत से 33 मेगावाट क्षमता की तीनों इकाइयों से लगभग 88 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
बिजली उत्पादन का 23 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
ओबरा। ओबरा जल विद्युत स्टेशन ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ओबरा पन बिजली परियोजना की टीम ने एक विशेष महीने में बनाए गए रिकॉर्ड उत्पादन को पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सितंबर में ओबरा बांध में भरपूर पानी उपलब्धता एवं हाइडिल की तीनों मशीनें कंडीशन में होने के कारण 50 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर 23 वर्ष पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। इसके पूर्व जुलाई 2000 में 49.03 मिलियन यूनिट और जुलाई 2001 में 49.72 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन करने का रिकॉर्ड ओबरा पन बिजली परियोजना के नाम है। अधिशासी अभियंता इं.आरएस जायसवाल ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि स्थापना के लगभग 50 वर्ष बाद भी बेहद कम खर्च में ओबरा हाइडिल से पूरी क्षमता के साथ ग्रीन एनर्जी पैदा करने का रिकॉर्ड बनाया जा रहा है। इससे देश-प्रदेश रोशन हो रहा है।