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350 गांवों में बागवानी के जरिए सुधारेंगे जीवन स्तर, नाबार्ड और आर्यावर्त बैंक के बीच हुआ करार

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लोढ़ी स्थित एक होटल में बैकर्स समझौता पप्रत्र दिखाते अधिकारी। - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। आदिवासी बहुल गांवों का जीवन स्तर सुधारने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) व आर्यावर्त बैंक ने संयुक्त पहल की है। बागवानी के जरिये आदिवासी परिवारों का जीवन स्तर सुधारने के लिए बुधवार को कलेक्ट्रेट के पास हुए कार्यक्रम में एमओयू साइन किया गया। 350 गांवों का चयन किया गया है जहां नाबार्ड और आर्यावर्त संयुक्त रूप से आदिवासियों का जीवन स्तर सुधारने की पहल करेंगे। इस दौरान बागवानी के कई पात्रों को स्वीकृति पत्र भी दिए गए।
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मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड शंकर ए पांडेय और आर्यावर्त बैंक के चेयरमैन एसबी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बताया कि नाबार्ड और आर्यावर्त बैंक की जिले की सभी 22 शाखाओं के माध्यम से आदिवासी बहुल गांवों में बारी/बागवानी और वाटर शेड योजना को मूर्त रूप दिया जाएगा। बताया कि जिले में अनुसूचित जाति की 22.64 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की करीब 20.67 प्रतिशत आबादी है। बागवानी योजना के तहत फिलहाल 5845 परिवारों को लाभान्वित किया गया है। प्रयास है कि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के 76 हजार से अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। इसी तरह वाटरशेड योजना के तहत जिले में 42287 परिवारों को लाभान्वित करते हुए 8370 हेक्टेयर जमीन पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। लगभग 350 गांवों में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस मौके पर डीजीएम नाबार्ड एस श्रीनाथ, क्षेत्रीय प्रबंधक आर्यावर्त ओपी गंगवार, विनोद कुमार, राजेश कुमार, एलडीएम मुकेश कुमार, चंदन शुक्ला आदि मौजूद रहे।
इस तरह सुधारेंगे जीवन स्तर
बारी-बागवानी योजना के तहत अनुसूचित जाति/जनजाति के पात्र नागरिकों के जमीनों पर वित्तीय मदद देकर फलदार पौधे लगवाए जाएंगे। लगभग सात साल पौधों की देखभाल करवाई जाएगी। इसके बाद आमदनी शुरू हो जाएगी जिससे संबंधित परिवारों में आत्मनिर्भरता आएगी और उनका जीवन स्तर ऊंचा होगा। कार्यक्रम संयोजक आर्यावर्त बैंक के शाखा प्रबंधक एसके तिवारी और डीडीएम नाबार्ड पंकज कुमार ने बताया कि जिले में 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति व जनजाति वाले गांव में बागवानी लगवाकर उनका जीवन स्तर बेहतर बनाने पर कार्य किया जा रहा है।
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