जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पूर्व ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने और नए ग्राम प्रधानों के शपथ के बीच विभिन्न ब्लॉकों में निर्माण और मरम्मत के नाम पर प्रशासकों ने करीब दस करोड़ रुपये से भी अधिक धनराशि का भुगतान कर दिया। जबकि शासन का निर्देश था कि प्रशासक अति आवश्यक कार्य पर ही धनराशि का भुगतान करेंगे।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पूर्व ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर 25 दिसंबर से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्रशासकों को दिया गया था। प्रशासकों के पास 27 मई तक चार्ज रहा। इस बीच पंचायत चुनाव संपन्न हुए। प्रधानों का शपथ भी अब हो चुका है। शासन का स्पष्ट निर्देश था कि ग्राम पंचायतों में जनसामान्य को पेयजल आदि बहुत ही जरूरी कार्य पर ही धनराशि का आहरण किया जाएगा लेकिन 25 दिसंबर से 27 मई तक के बीच तैनात किये गए कुछ प्रशासकों ने पंचायत सचिवों की मिलीभगत से करीब दस करोड़ रुपये से भी अधिक धनराशि का भुगतान कर दिया।
यह भुगतान 14वां और 15वां वित्त से किया गया है। हैंडपंपों की मरम्मत, रिबोर, सीसी रोड, इंटरलाकिंग के कार्य के नाम पर यह राशि भुगतान की गई है। इस बाबत जिला पंचायत राज अधिकारी विशाल सिंह ने कहा कि शायद ही कहीं सीसी रोड और इंटरलॉकिंग पर भुगतान किया गया हो। सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, कायाकल्प और हैंडपंप मरम्मत के लिए ही धनराशि व्यय करने का निर्देश प्राप्त हुआ था। अब कितने का भुगतान हुआ है यह उनके संज्ञान में नहीं है। इसे दिखवाया जाएगा।
जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर जमकर मनमानी की जा रही है। ऐसा ही एक मामला चतरा ब्लॉक के सेहुआं ग्राम पंचायत का आया है। कुछ लोगों ने शिकायत की है कि इस ग्राम पंचायत में पुराना पंचायत भवन था। उस भवन को ही नया दिखा दिया गया है और उस पर करीब 17 लाख 46 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया है। यहां तैनात सचिव शिवकुमार कुशवाहा का कहना है कि पुराने भवन को ढहाकर नया भवन बनाया गया है लेकिन पुराने भवन का ईंट और अन्य सामान कहां गया, क्या उसकी नीलामी की गई या विभाग को इसके बारे में जानकारी दी गई, इस पर वे कुछ नहीं बता सके। उधर डीपीआरओ विशाल सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल व एक अवर अभियंता को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।55