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सिल्थम में हुआ आदिवासी समागम, पूर्व मंत्री ने कहा आदिवासी संस्कृति, लोक कला को जीवंत रखना जरूरी

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रामगढ़। आदिवासियों की शिक्षा पर विशेष जोर देने की जरूरत है। साथ ही उनकी संस्कृति, लोक कला को जीवंत रखना भी जरूरी है ताकि उनकी पहचान नष्ट न होने पाए। आदिवासियों के उत्थान को लेकर जो प्रयास चल रहा है उसमें सभी का सहयोग जरूरी है। यह बातें मंगलवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने चतरा ब्लाक के सिल्थम स्थित प्राथमिक विद्यालय में आयोजित आदिवासी समागम में कहीं।
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बनवासी कल्याण आश्रम की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को वो बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ बिरसा मुंडा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा कि धांगर जाति जो पहले उरांव जाति कही जाती थी, इनकी संस्कृति, लोक कला, पूजन, भाषा को हम जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं। उसमें सभी का सहयोग आवश्यक है। साक्षरता पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है। उरांव जाति के लोग हर देवी-देवताओं को मानते हुए उनकी पूजा करते हैं। संस्कृति, भाषा, लोक नृत्य, खान-पान, रहन-सहन को जीवंत रखने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करना चाहिए। जिससे संस्कृति नष्ट न होने पाए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से आई महिलाओं और पुरुषों ने करमा नृत्य प्रस्तुत किया। सह संगठन मंत्री आनंद, भाजपा जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शीतला आचार्य के साथ ही राम बचन धांगर सहित अन्य ने संबोधित किया। इस मौके पर राधेश्याम बंका, आलोक चतुर्वेदी, शिवप्रसाद, राम अधार, गोपाल जायसवाल, भूपेंद्र प्रताप सिंह, लल्लू धांगर आदि मौजूद थे। अध्यक्षता रामबचन धांगर ने की। संचालन नंद लाल विश्वकर्मा ने किया।
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