जिंदगी ने जिस किशोरी से पहले माता-पिता और फिर भाई का सहारा छीना, उसे बीमारी ने एक बार फिर बेसहारा कर दिया। पड़ोसियों का साथ छूटने के बाद वह मिर्जापुर के एक होटल में काम कर किसी तरह गुजारा कर रही थी। बीमार हुई तो होटल संचालक ने भी उसे वहां रखने से मना कर दिया। कुछ लोगों ने उसे बस में बैठाकर सोनभद्र भेज दिया। रास्ते में हालत बिगड़ी तो मधुपुर तिराहे पर बस से उतार दिया गया। बेहोशी हालत में सड़क किनारे पड़ी किशोरी पर पीआरडी जवान की नजर पड़ी तो उसने अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई।
मधुपुर कस्बे के उत्तरी तिराहे के पास दोपहर में एक निजी बस से किशोरी को उतारकर सड़क किनारे लिटा दिया गया था। लोगों की सूचना पर वहां तैनात पीआरडी जवान ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मधुपुर पहुंचाया। उपचार के बाद हालत सामान्य होने पर उसने अपनी आपबीती बताई। किशोरी ने बताया कि बचपन में ही माता-पिता की मौत हो गई थी। कुछ समय बाद भाई की भी मृत्यु हो गई। कुछ दिन पड़ोसियों के सहारे रहने के बाद उनका साथ भी छूट गया। इसके बाद वह मिर्जापुर के एक होटल में कपड़े और खाने के बदले काम करने लगी। दो-तीन दिन पहले तबीयत खराब हुई तो उसके अनुसार होटल संचालक ने उसे वहां रखने से मना कर दिया। इसके बाद कुछ लोगों ने उसे बस में बैठा दिया। हालत बिगड़ने पर उसे मधुपुर में उतार दिया गया। मामले की जानकारी सुकृत चौकी पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन को दी गई। काउंसलर अनुराधा जायसवाल ने मधुपुर पहुंचकर किशोरी से जानकारी ली। सीओ सिटी रणधीर मिश्रा ने भी चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी थी। इसके बाद सीएचसी प्रभारी डॉ. अखिलेश से संपर्क कर किशोरी को विधिक संरक्षण में लिया गया और बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। काउंसलर के मुताबिक किशोरी काफी डरी हुई है और अभी ज्यादा जानकारी नहीं दे पा रही है। फिलहाल उसके अनाथ होने और मिर्जापुर के होटल में काम करने की जानकारी सामने आई है। जिला प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर मुकेश सिंह ने बताया कि किशोरी को बाल गृह बालिका में आवासित करा दिया गया है। उसकी काउंसलिंग जारी है।