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Sonebhadra News: छह अफसरों की टीम ने किया था दौरा, किसी को नजर नहीं आई खदान की गहराई

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सोनभद्र। ओबरा खनन क्षेत्र की हादसे वाली खदान को लेकर एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। जिस खदान में हादसा हुआ, उसकी स्थिति की जांच के लिए पिछले वर्ष छह अफसरों की टीम ने दौरा किया था। खान सुरक्षा, यूपीपीसीबी, खनन और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक-एक बिंदु की जांच के बाद जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और बेंच बनाकर खनन का दावा करते हुए संचालकों को क्लीनचिट दे दी गई थी। अब जब राहत कार्य के दौरान 150-200 फीट की गहराई सामने आई तो निरीक्षण के लिए जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं।
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एनजीटी में दाखिल याचिका और उस पर नौ अगस्त 2024 को खदानों में मानक से अधिक गहराई को लेकर जांच-कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस पर डीएम की तरफ से मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की तरफ से संचालित खदान सहित अन्य की जांच के लिए 30 अक्तूबर 2024 को छह अफसरों की टीम गठित की गई थी। 12 नवंबर 2024 को खान सुरक्षा निदेशक वाराणसी, एसडीएम ओबरा, प्रभारी अधिकारी खनन, क्षेत्रीय अधिकारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ज्येष्ठ खान अधिकारी, एसडीओ ओबरा वन प्रभाग और खनिज सर्वेक्षक की मौजूदगी वाली टीम ने खनन पट्टा क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। अगले दिन डीएम को इसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। सिर्फ मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग ही नहीं जांच के दायरे में आई चारों खदानों में खनन कार्य स्वीकृत क्षेत्र के अंदर कराए जाने, खनन से किसी जीव-जंतु को किसी भी तरह से क्षति न पहुंचने, श्रमिकों को सभी जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने, खनन कार्य प्रशिक्षित ब्लास्टर की देखरेख में बेंच बनाकर किए जाने की रिपोर्ट सौंपी गई। अब जब मानक के अनुरूप खनन की बात कहते हुए डीएम की तरफ से एनजीटी में शपथ पत्र सौंपने की बात सामने आई है तो संयुक्त जांच समिति में शामिल अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं।
जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त मैं खदान में ही थी। मेरे दो भाई खदान में दबकर मर गए। घटना के वक्त उसके अलावा 18 मजदूर कार्य कर रहे थे। किसी को कोई भी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया था। - छोटू यादव (मृतक का भाई)।
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जिस खदान में हादसा हुआ उसको लेकर मैंने एनजीटी में याचिका दाखिल कर रखी है। एनजीटी ने जांच का निर्देश दिया था। जांच रिपोर्ट और जिला प्रशासन की ओर से जो हलफनामा दाखिल किया, उसमें सब कुछ सही बताया गया। किन हालात में ऐसा किया गया? इसकी जांच कर कार्रवाई हो। - एडवोकेट ऋतिशा गोंड, याचिकाकर्ता।
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