सोनभद्र। सलखन फाॅसिल्स पार्क का नाम यूनेस्को की संभावित सूची में आने के बाद इसे स्थायी सूची में जगह दिलाने की कवायद तेज हो गई है। पर्यटन विभाग डाेजियर तैयार कर रहा है। वहीं, यूनेस्को की टीम भी प्रमुख विरासतों की स्थिति जांचने में जुटी हुई है। सब कुछ ठीक रहा तो सलखन को अफ्रीका के बार्बरटन मखोनज्वा पर्वत के बाद दुनिया की दुनिया की सबसे पुरानी धरोहर का दर्जा हासिल हो जाएगा।
अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क और सोनभद्र के फाॅसिल्स पार्क की परिस्थितियां (स्ट्रोमेटोलाइट्स और माइक्रोफॉसिल्स का बड़ा संग्रह) करीब-करीब एक जैसी हैं। खास बात यह है कि येलोस्टोन महज 500 मिलियन वर्ष पुराने हैं, जबकि सलखन के फॉसिल्स 1.4 बिलियन वर्ष से अधिक प्राचीन हैं। येलोस्टोन के मुकाबले ज्यादा समृद्ध और सुरक्षित हैं। येलोस्टोन वर्ष 1978 में विश्व विरासत घोषित हो चुका है। यहां अभी इंतजार है। जिन तथ्यों के आधार पर सलखन फाॅसिल्स को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया है उस पर नजर डालें तो यहां के फाॅसिल्स और कनाडा स्थित बी मिस्टेकन पॉइंट दोनों ही जीवन की उत्पत्ति के बारे में विशिष्ट जानकारियां प्रदान करते हैं लेकिन प्राचीनता और जानकारियों के मामले में सलखन फाॅसिल्स खास हैं।
इसी तरह कनाडा की सी जोगिंस जीवाश्म चट्टान जीवन के उन्नत स्वरूप का वर्णन करती है, जबकि जिले के फाॅसिल्स जीवन के शुरुआती चरण का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्राचीनता के मामले में दक्षिण अफ्रीका का बार्बरटन मखोनज्वा पर्वत ही जीवन उत्पत्ति से जुड़ी एक ऐसी विरासत है, जो प्राचीनता के मामले में सोनभद्र फाॅसिल्स को पीछे छोड़ता है। इसके चट्टानों की उम्र 3.6 बिलियन वर्ष से भी अधिक आंकी गई है। कहा जाता है कि यह चट्टानें इनसे पृथ्वी की प्रारंभिक पपड़ी के निर्माण से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराती हैं।
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इसलिए खास हैं सलखन के फाॅसिल्स
सलखन के फाॅसिल्स विश्व की प्राचीन विरासतों में एक ही, जिसका संबंध जीवन की उत्पत्ति के समय वायुमंडल को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने से जुड़ा है। भूवैज्ञानिकों के मुताबिक प्रकाश संश्लेषण के जरिये पहली बार ऑक्सीजन बनने की प्रक्रिया समुद्री शैवालों से शुरू हुई। यहां के जीवाश्मों के रूप में इसका विस्तृत स्वरूप हर किसी को विस्मित कर देता है। संजीदगी भरी पहल हुई तो शोध, पर्यटन और कौतूहल का यह केंद्र सलखन की तस्वीर बदल जाएगी।
वर्जन- सलखन के फासिल्स दुनिया के दूसरे जीवाश्मों के मुकाबले कहीं अधिक समृद्ध और विशिष्ट हैं। इसे बहुत पहले विश्व विरासत घोषित किया जाना चाहिए था। उम्मीद है कि जल्द ही यह स्थल शैक्षिक पर्यटन के बड़े केंद्र के साथ जीवन की उत्पत्ति से जुड़ी जटिलताओं के अध्ययन में बड़े मददगार की भूमिका निभाएगा। - नागेश्वर दुबे, भूगर्भशास्त्री।
यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हो चुके सलखन को स्थायी सूची में जगह दिलाने के लिए विस्तृत डोजियर तैयार किया जा रहा है। पार्क के सुंदरीकरण का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है ताकि इस धरोहर को संजोया और संवारा जा सके। - डॉ. प्रखर मिश्र, पर्यटन निदेशक, उत्तर प्रदेश।