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Sonebhadra News: गांवों में शारीरिक श्रम में आई कमी, नतीजा-शुगर, बीपी, थायरॉइड जैसी बीमारियों ने जकड़ा

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मेडिकल कालेज अस्पताल के एलटू में मरीजों की लगी भीड़। संवाद - फोटो : विद्यालय में खड़ी स्कूली बसें।
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सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचने वाले युवाओं (30 से 40 वर्ष) की स्थिति पर ध्यान दें तो हर 20वां मरीज किसी न किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित पाया जा रहा है।
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चिंता की बात यह है कि गांव के जिन मेहनतकश युवा-युवतियों को शारीरिक रूप से फिट माना जाता था। उनमें भी शुगर, बीपी, थाइराइड जैसी बीमारियां पनप रही हैं। इस कारण सुख-सुविधा की बढ़ी लालसा के साथ ही लोगों के शारीरिक श्रम में आई कमी को तो कारण माना ही जा रहा है।
खुद को फिट रखना है तो जीवनशैली सुधारनी होगी। अनियमित दिनचर्या, बेतरतीब खानपान और देर रात जगने की आदत लोगों को तेजी से बीमार कर रही है।
पहले जहां 50 की उम्र के बाद शुगर, बीपी जैसी बीमारियां होती थीं, अब वह युवा उम्र में ही दिखने लगा है। नगरीय क्षेत्रों के अलावा वह गांव भी इससे पीछे नहीं है, जहां की शुद्ध हवा और संतुलित खान-पान को जहां सेहत की गारंटी माना जाता है। स्थिति को देखते हुए लोगों से जीवन शैली सुधारने, खान-पान संतुलित रखने और रोजाना सुबह की सैर, व्यायाम की अपील की जा रही है।
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