सोनभद्र। तीन साल की उम्र के बाद भी अगर आपका बच्चा शांत रहे और अटककर बोले तो यह ऑटिज्म का लक्षण हो सकता है। मेडिकल काॅलेज अस्पताल स्थित मनकक्ष में हर माह दस से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
जिले में बच्चों के अंदर ऑटिज्म के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एक न्यूरोलॉजिकल विकासात्मक विकलांगता है, जो सामान्य मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है। संचार, सामाजिक संपर्क, अनुभूति और व्यवहार को बाधित करती है। ऐसे में अगर आपके बच्चे को भी पढ़ने-लिखने, सुनने-बोलने में परेशानी आ रही है, तो सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि बच्चा ऑटिज्म की चपेट में भी हो सकता है। मेडिकल कॉलेज में मानसिक विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर जितेश गुप्ता ने बताया कि ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों में लड़कियों के मुकाबले लड़कों की संख्या तीन गुना ज्यादा है। अस्पताल में हर माह ऐसे आठ से 12 मामले आ रहे हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान अच्छा खानपान ना होने के कारण मस्तिष्क का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है और बच्चे ऑटिज्म का शिकार हो जाते हैं। इस बीमारी की चपेट में आने के बाद बच्चा या कोई इंसान बाहरी दुनिया से अलग अपनी दुनिया में खोया रहता है। इसलिए कुछ लोग उन्हें मंदबुद्धि भी समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। यह सिर्फ एक मिथ्या है. ऑटिज्म से ग्रस्त लोग मंदबुद्धि नहीं होते हैं। यह बात जरूर है कि समाज से घुलने मिलने में उनमें झिझक होती है। बताया कि ऑटिज्म का शिकार कोई बच्चा मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर होता है। ऑटिज्म पीड़ित बच्चों में मिर्गी की समस्या भी हो सकती है। कई मामलों में बच्चों को बोलने और सुनने में भी परेशानी होती है। पीड़ित बच्चे में आमतौर पर सामाजिक, भावनात्मक और बातचीत करने में समस्याएं होती हैं।
इसके लक्षण को पहचाने
बच्चे में ऑटिज्म के लक्षण तीन साल की उम्र में ही नजर आने लगते हैं। ऑटिज़्म के पीड़ित बच्चे एक ही काम को बार-बार दोहराते हैं। कई बच्चों में एक डर सा दिखाई देता है तो कुछ बच्चे जल्दी से प्रतिक्रिया नहीं देते। बच्चे को बातें समझने में कठिनाई होती है। मन ही मन बड़बड़ाते हैं। शब्दों को समझ नहीं पाते है। आंखें मिलाकर बात नहीं कर पाते हैं। उठने-बैठने, खाने-पीने का बर्ताव भी औरों से अलग होता है।
इस तरह रखें ख्याल
प्रो. जितेश ने बताया कि बच्चे को कुछ भी समझाएं तो धीरे-धीरे एक-एक शब्द बोलें और बच्चे के साथ उसे दोहराएं। बच्चों को फोटो के जरिए चीजें समझाएं। उन्हें आउटडोर गेम्स खिलाएं। इससे बच्चे का थोड़ा कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।
यह भी हो सकती है वजह
अनुवांशिकी कारणों से बच्चों में इस रोग के लक्षण दिखते हैं। इसके अलावा पर्यावरण को भी कारक माना जा सकता है। इसमें प्रदूषण के अलावा कीटनाशक का इस्तेमाल सहित अन्य कारण शामिल है।