सोनभद्र। नक्सल, दुरूह क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात शिक्षकों को विशेष सुरक्षा भत्ता की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए शासन के निर्देश पर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की सूची तैयार की गई है। बीएसए ने 980 विद्यालयों की सूची शासन को भेज दी है। शासन से मुहर लगते ही शिक्षकों को विशेष सुरक्षा भत्ता मिलने लगेगा।
सूबे के एक छोर पर बसे सोनभद्र जिले में अधिकांश अशिक्षित लोग निवास करते हैं। शिक्षकों की कमी होने से दुरूह, नक्सल क्षेत्र के कई विद्यालयों में ताला लटक रहा है। शिक्षक इस क्षेत्र में जाना नहीं चाहते हैं। वहीं दर्जनों विद्यालय शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा से सटे गांवों में स्थित विद्यालयों में तैनात अधिकांश शिक्षक ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। माह में कभी कभार जाकर वे नौकरी पक्की कर लेते हैं। मुख्यालय से सौ किमी दूरी पर स्थित विद्यालयों में जिलास्तरीय अधिकारी भी जल्द निरीक्षण करने नहीं पहुंचते हैं। वजह आवागमन की व्यवस्था न होना है। विद्यालयों में शिक्षकों के न होने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
अभिभावक चाह कर भी बच्चों को शिक्षित नही कर पा रहे हैं। ऐसे में अनपढ़ों की संख्या में कमी नहीं हो रही है। इसका फायदा पड़ोसी राज्यों के नक्सली उठाना चाह रहे हैं। हालांकि सपा सरकार ने शिक्षा का स्तर बढ़ाने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। शासन के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने नक्सल, दुरूह क्षेत्र में स्थित विद्यालयों और उनमें तैनात शिक्षकों की सूची तैयार की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रभुराम चौहान का कहना है कि शासन को 980 विद्यालयों की सूची भेजी गई है, जिसमें 740 प्राथमिक विद्यालय और 240 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल है। शासन से निर्देश मिलते ही दुरूह, नक्सल क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात और होने वाले शिक्षकों विशेष सुरक्षा भत्ता मिलने लगेगा।