सोनभद्र। मोहर्रम की छठवीं तारीख पर बुधवार को नगर में अली असगर के झूले का जुलूस निकाला गया। साथ ही नौजवान वारसी कमेटी द्वारा यादगारे हुसैन पर नगर पालिका के पास मजलिस का भी आयोजन किया गया।
जलसे में मौलाना इबादत हुसैन ने कहा कि मोहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है, जिसमें इमाम हुसैन ने इस्लाम की बका व हिफाजत के लिए सब्र इंसानियत के लिए अपना सब लुटा दिया और पूरी दुनिया में एक पैगाम दे गए कि आपस में मेल मिलाप कर हक व बातिल से मुकाबला करें। मोहर्रम खेल व नगाड़ों का त्योहार नहीं, बल्कि सब्र व गमख्वारी का त्योहार कहा जाता है। मौलाना निहाल रजा नूरी ने शहीदे कर्बला का बयान करते हुए कहा कि यजीद ने अपनी मक्कारी-फरेब के बल पर हुकूमत हासिल कर इमाम हुसैन को अपनी बैयत कबूल करने को मजबूर किया। मजीद ने 22 हजार फौज लेकर 72 हजार सहाबियों को घेर लिया। हक व इंसानियत का रास्ता बताने वालों को एक-एक बूंद पानी के लिए प्यासा और भूखा रखा और बेगुनाहों का कत्ल किया। नन्हें मासूमों को मार डाला और लाशों पर घोड़ा दौड़ाया। औरतों को बंदी बनाया। अंत में हुसेन भी सजदे की हालत में शहीद हो गए। मुस्लिम समाज के सदर एजाज कादरी प्यारे भाई ने कहा कि कर्बला की घटना दुनियां की तारीख में पहली आवाज है और शायद आखिरी भी, जो मजलूमों के लिए उठी और जिसकी सदा आज तक वातावरण में गूंज रही है। प्यारे ने कहा कि यजीद में इंसानियत नहीं थी। वह जानवरों से भी बदतर था। इमाम हुसैन की शहादत पूरी दुनियां में एक पैगाम दे गई कि आपस में मिलजुलकर हक व बातिल से मुकाबला करें। मजलिस का संचालन जावेद कादरी ने किया। शायरे इस्लाम जनाब नियाज सोनभद्रवी ने पढ़ा, मेरे भी हैं हुसैन, तुम्हारे भी हैं हुसैन, हर शय पुकारती है हमारे भी हैं हुसैन। लोगों ने नातेपाक को खूब सराहा। इस मौके पर सैयद सद्दाम, रिजवान वारसी, इमरान अत्तारी, कामरान, विक्की, वारिस अली आदि मौजूद थे।