नपरा। स्थानीय तापीय परियोजना परिसर स्थित राजकीय इंटर कालेज को परियोजना ने निर्माण के समय 1982 में गोद ले लिया था। लेकिन अपनी स्थापना के तीसवें साल में भी यह स्कूल अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाले सत्रह सौ छात्र-छात्राओं में से आधे अभी भी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने के लिए विवश हैं। यहां न तो पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था है न तो टायलेट की। जीर्ण अवस्था में स्कूल भवन कब धराशायी हो जाए कहा नहीं जा सकता। विद्यालय के दीवारों पर कई सालों से पुताई न होने से काई बैठ गई है। इसमें पढ़ने वाले छात्रों को न तो खेलने के लिए कायदे का मैदान है न तो सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए हाल। टाट-पट्टी अथवा बेंच की जो व्यवस्था है भी वो अभिभावकों द्वारा दिए गए चंदे की बदौलत मुक्कम्मल हो सका है।
ऊर्जांचल में इंटरमीडिएट तक शिक्षा का अलख जगाने वाले सबसे पुराने इंटर कालेजों में से एक अनपरा का राजकीय इंटर कालेज तापीय परियोजना द्वारा उपेक्षित रवैये के कारण कबाड़ होता जा रहा है। चूंकि इस विद्यालय में मानवीय संसाधन उप्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड उपलब्ध करा रही है जबकि भौतिक संसाधन अर्थात भवन से लेकर उसका मेंटिनेंस आदि की सुविधा उत्पादन निगम को उपलब्ध कराने का दायित्व मिला है। विद्यालय का अनुरक्षण काफी दिनों से न होने से अभिभावकों में रोष है। ऐसा नहीं है कि इस विद्यालय में विद्यार्थियों की कमी है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी राजकीय इंटर कालेज में 1752 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था।
पूरे प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में प्रवक्ताओं की काफी कमी है इसे देखते हुए 17 प्रवक्ताओं के स्थान पर 15 है जिसे काफी ठीक माना जा सकता है। एलटी ग्रेड के शिक्षकों की यहां बेहद कमी है 23 शिक्षकों की भरपाई महज 10 शिक्षक ही कर रहे है। लेकिन जीर्णशीर्ण अवस्था में हो चुका भवन हादसे दावत दे रहा है। विद्यालय की साफ-सफाई का दायित्व परियोजना प्रबंधन पर है लेकिन इस स्कूल में एक भी सफाई कर्मी नियुक्त नहीं किया गया है।