ओबरा। विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में मंगलवार को हुई बैठक में करछना परियोजना को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय का खासा विरोध किया गया। अवर अभियंताओं का नियुक्ति ग्रेड पे 4200 से 4600 किए जाने, सहायक अभियंता की नियुक्ति ग्रेड पे 6600 करने और वेतन विसंगतियों को दूर करने, ऊर्जा निगमों में कंसल्टेंटों के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी वरोकने, गत पांच अप्रैल को हुए लिखित समझौते को प्रभावी बनाने की भी मांग उठाई गई।
विद्युत अभियंता संघ के महासचिव इं. जीव सिंह ने कहा कि अविलंब वेतन विसंगति दूर की जाए। उधर, आल इंडिया पावर इंजीनियर एसोसिएसन के अध्यक्ष एवं संरक्षक इं. शैलेंद्र दूबे ने कहा कि पांच अप्रैल के समझौते में स्पष्ट लिखा गया था कि उत्तर प्रदेश में कहीं भी निजीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। बावजूद 1320 मेगावाट क्षमता की करछना परियोजना को राज्य विद्युत उत्पादन निगम से वापस लेकर निजी हाथों में सौंपने का सरकार निर्णय लिया है। इस निर्णय की आलोचना करते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की गई। कहा गया कि पूर्व में निजीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिसमें कैग ने इसमें 12 हजार करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इस मौके पर इं. यूसी मिश्र, राजेंद्र सिंह, आरके गुप्ता, आरके सिंह, एलबी यादव, बीएन सिंह, अवधेश सिंह, आरपी मल्ल, मनीष तिवारी, अंकित प्रकाश, अजय द्विवेदी, सचिन चौहान, अतुल शर्मा, सचिन गुप्ता, सिद्धार्थ सिंह, धीरज वर्मा, पीयूष धर द्विवेदी, विनय दीक्षित आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता महाप्रबंधक इं. कैलाश गुप्ता और संचालन क्षेत्रीय सचिव इं. अदालत वर्मा ने किया।