सोनभद्र। जिले की सीमा को ई-वे बिल से मुक्त करने समेत अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने डीएम को मुख्यमंत्री के नाम छह सूत्री मांगपत्र सौंपा। मुख्यमंत्री द्वारा एक माह में व्यापारी को तीन रिटर्न भरने की जगह एक रिटर्न भरे जाने के लिए गए निर्णय की प्रशंसा की।
प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल जैन ने कहा कि हर जिले में बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर अपने सेल्स वाहनों से प्रतिदिन विभिन्न उत्पादों को लेकर नगर एवं गांव की दुकान-दुकान बेचने जाते हैं। जिस दुकान पर जो माल बिकता है, वहीं पर उसका बिल बनाया जाता है। सेल्स वाहन में सभी उत्पाद मिलाकर 50 हजार से अधिक का माल होता है। ऐसे में जिले की सीमा को ई-वे बिल से मुक्त किया जाए। जिलाध्यक्ष रतन लाल गर्ग ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि ई-वे बिल का फिजिकल कापी न होने पर जीएसटी अधिकारी द्वारा माल जब्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन कराया जाए। जीएसटी में समाधान योजना के लिए एक करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन सर्कुलर जारी नहीं किया। महामंत्री हिदायत उल्ला खां ने कहा कि ई-वे बिल का पार्ट बी भरने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टरों की भी होनी चाहिए। विमल अग्रवाल रिफंड करने की व्यवस्था हर महीने की जाए, ताकि व्यापारियों की पूंजी न फंस सकें। इस दौरान रामेश्वर जैन, अशोक कुमार जैन, कौशल शर्मा मौजूद रहे।