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धांगर समाज को मिले आदिवासी का दर्जा

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रामगढ़। चतरा ब्लाक के दुपटिया में शुक्रवार को हुए आदिवासी अधिकार सम्मेलन में धांगर बिरादरी को अब तक आदिवासी का दर्जा न मिलने और इस बिरादरी के लिए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी होने पर लगी रोक पर नाराजगी जताई गई। स्वराज अभियान के नेता एवं पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी ने कहा कि 1965 में भारत सरकार की लोकर कमीशन ने धांगर बिरादरी को आदिवासी का दर्जा देने की सिफारिश भी की थी। बावजूद अब तक आदिवासी का दर्जा तो नहीं मिल पाया, अलबत्ता अनुसूचित जाति का भी दर्जा छीन लिया गया।
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स्वराज अभियान के राज्य समिति सदस्य दिनकर कपूर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 का उल्लंघन करते हुए सरकारों और एससी आयोग ने अनुसूचित जाति की सूची में धांगर को धनगर कर दिया। सोनभद्र में रहने वाली इस जाति का परीक्षण करने की जगह मथुरा और आगरा का सर्वे कराया गया और इस आधार पर कह दयिा गया कि उत्तर प्रदेश में तो धांगर जाति ही नहीं है। कहा कि बुलंदशहर के भाजपा विधायक अनिल शर्मा के पत्र पर जिला प्रशासन ने गत 27 जून से जनपद के धांगर जाति के एससी प्रमाण पत्र को जारी करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अध्यक्षता कर रहे फूलचंद धांगर, संचालन कर रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य बबलू धांगर ने कहा कि इससे प्रदेश सरकार को आदिवासियों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुन्ना धांगर, धांगर महासभा के अध्यक्ष रामाधार धांगर, महामंत्री बुद्धि नारायण धांगर, हरी प्रसाद तिर्की, प्रधान चंपा धांगर, बीरबल धांगर, विजेंद्र धांगर, श्रीनाथ धांगर, मठालू धांगर, बुद्धि नारायन टोपा, जितेंद्र लकड़ा, रामजतन धांगर, मनीष लकड़ा, मुकेश लकड़ा आदि ने भी विचार व्यक्त किए।धांगर जाति के अधिकार के लिए बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया।
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