सोनभद्र। दो दिन मेें जिले में कार्यरत 765 शिक्षा प्रेरकों की सेवा समाप्त हो जाएगी। इसके लिए शासन ने शिक्षा विभाग को निर्देशित कर दिया है। इसकी जानकारी होने पर प्रेरकों में हड़कंप मच गया है। बताते चले कि शिक्षा प्रेरकों का करीब 18 माह का मानदेय बकाया है। बकाया भुगतान की मांग को लेकर प्रेरक धरना-प्रदर्शन कर चुके है।
सूबे के एक छोर पर बसे अतिनक्सल प्रभावित सोनभद्र के जंगली एवं पहाड़ी इलाकों में अधिकांश अशिक्षित लोग निवास करते है। अधिकत्तर गरीब, आदिवासी व वनवासी अपना नाम तक नहीं लिख सकते है। इसको गंभीरता से लेते हुए नवंबर 2014 मेें केंद्र सरकार ने साक्षर अभियान के तहत ग्राम पंचायतें में शिक्षा प्रेरकों को तैनात किया। शिक्षा प्रेरकों को 15 वर्ष की आयु के ऊपर के अशिक्षित लोगों को पढ़ा कर साक्षर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि सभी लोग शिक्षित होकर सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के बारे में जान सकें। शिक्षा प्रेरकों के प्रयास से हजारों लोग अशिक्षित लोग शिक्षित हो गए है। पढ़ाने के एवज में प्रेरकों को प्रति माह दो हजार रुपये मानदेय मिलता है। लेकिन मार्च 2016 तक का ही प्रेरको को मानदेय मिला है। अब प्रदेश सरकार प्रेरकों की सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया है। साक्षर भारत मिशन की जिला समन्यवक कमर खातुन ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 30 सितंबर तक ही शिक्षा प्रेरकों की सेवा लेने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा प्ररकों की करीब 18 माह का मानदेय बाकी है। उच्चाधिकारियों को प्रेरकों का बकाया मानदेय भुगतान करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।