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प्लास्टिक मुक्त होंगे सोनभद्र के 61 गांव : पंचायती राज विभाग ने की अनूठी पहल, पुरस्कृत होंगी पंचायतें

Tue, 26 Nov 2024 08:08 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र

सार

सोनभद्र के 61 गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण दिया गया। पंचायती राज विभाग की अनूठी पहल से गांव की तस्वीर बदलेगी और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होंगे। 
 
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ग्राम प्रधानों को प्लास्टिक मुक्ति की ट्रेनिंग देते अधिकारी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सोनभद्र पंचायती राज विभाग ने जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने की पहल की है। यह अभियान पहले चरण में 61 ग्राम पंचायतों के साथ शुरू होगा। मंगलवार को विकास भवन के पंचायत रिसोर्स सेंटर में 35 ग्राम पंचायतों के प्रधान, पंचायत सहायक और सफाई कर्मचारियों की बैठक में उन्हें अपनी ग्राम पंचायत को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सक्रियता निभाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

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प्रशिक्षण में डीपीआरओ नमिता शरण ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक से चुनी गईं 5 ग्राम पंचायत को प्लास्टिक फ्री बनाना है। इसके लिए अभियान को 5 चरणों में बांटा गया है। जो गांव प्लास्टिक फ्री बनाए जाएंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जिले को प्राप्त होने वाले पुरस्कारों में प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री पुरस्कार योजना और पंचायत सशक्तिकरण योजना में भी गांव के चयन में प्लास्टिक के जरिए राजस्व बढ़ाना अहम बिंदू होगा।

जो ग्राम पंचायत प्लास्टिक मुक्त होगा, उसे जनपद स्तर पर पुरस्कृत कराया जाएगा। जिला परियोजना समन्वयक अनिल केशरी ने बताया कि सभी ग्राम में प्लास्टिक सबसे बिखरा हुआ कूड़ा है। जल, मृदा के साथ मानव और पशुओं के स्वास्थ्य पर इसका कुप्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाना हमारी वर्तमान और नई पीढि़ के लिए बड़ा तोहफा होगा। प्रशिक्षण में संबंधित ब्लॉकों के एडीओ पंचायत, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव,  अनूप कुमार पाल, किरन सिंह उपस्थिति रहीं।
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पांच चरणों में होगा काम
ग्राम पंचायत को प्लास्टिक मुक्त बनाने का कार्य पांच चरण में होगा। प्रथम चरण में गांव के लोगों की बैठक कर उनकी सहभागिता ली जाएगी। एक तिथि सुनिश्चित करते हुए पूर्व से फैले हुए प्लास्टिक को एक जगह इकट्ठा किया जाएगा। दूसरे चरण में सभी घरों पर बोरी लगाकर लोगों को अपने प्लास्टिक कचरे को बोरी में रखने को प्रेरित किया जाएगा। तृतीय चरण में ग्राम पंचायत में ई-रिक्शा के माध्यम से उन प्लास्टिकों को बोरियों से संकलित किया जाएगा और फिर आरआरसी पर उसे रखा जाएगा। गांवाें से एकत्रित प्लास्टिक विकास खंड पर जमा होगा, जहां से उसे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में प्रोसेसिंग के लिए भेज दिया जाएगा।

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