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Sonebhadra News: खाते में 56 लाख, पर मेडिकल कॉलेज ने नहीं किया भुगतान, आयुष्मान कार्ड से ऑपरेशन बंद

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ऑपरेशन की बारी का इंतजार करते मरीज। - संवाद
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सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में जिम्मेदारों की लापरवाही आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को पलीता लगा रही है। अप्रैल से अब तक आयुष्मान मरीजों के उपचार के एवज में दिए जाने वाले भुगतान के लिए मेडिकल कॉलेज (जिला अस्पताल शामिल) के रोगी कल्याण समिति खाते में 56 लाख रुपये से अधिक की रकम डंप पड़ी है। बावजूद ऑपरेशन के समय इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण-राॅड-प्लेट उपलब्ध कराने वाली संस्था सहित अन्य का भुगतान अटका पड़ा है। इसके चलते संबंधित फर्म ने दी जाने वाली आपूर्ति रोक दी है। इससे एक सप्ताह में 20 से अधिक ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं। गंभीर स्थिति वालों को मजबूरन निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ रही है।
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स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेज में ऑर्थों, सर्जरी और फिजिशियन विभाग में गंभीर मरीजों को आयुष्मान कार्ड से निशुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। संबंधित डॉक्टर ऑपरेशन के लिए जरूरी चीजों, खर्च का विवरण तैयार करते हैं। ऑनलाइन एस्टीमेट अनुमोदन किया जाता है। मंजूरी मिलते ही मरीज का ऑपरेशन होता है। मरीजों, खासकर आर्थो के मरीजों को प्लेट, राॅड या जिस भी इंस्ट्रूमेंट की जरूरत पड़ती है उसकी आपूर्ति के लिए अनुबंध वाली फर्म को निर्देश जारी किया जाता है। बाद में संबंधित फर्म-संस्था बिल देती है। इसकी जांच कर भुगतान किया जाता है। अप्रैल 2025 से लेकर अब तक हड्डी रोगियों के लिए वाराणसी की एक फर्म 25 लाख की आपूर्ति दे चुकी है। बिल और कई बार अनुरोध के बाद भी भुगतान न होने पर संबंधित फर्म ने आपूर्ति रोक दी है। जानकारी के मुताबिक, हर महीने आर्थो में लगभग 40 और सर्जरी में 80 गंभीर मरीजों को आयुष्मान के जरिये उपचार-ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति ठप होने से आयुष्मान कार्डधारकों को मिलने वाली ऑपरेशन की सुविधा फिलहाल बंद सी हो गई है।
केस एक
चोपन क्षेत्र के रहने वाले विकास होली से पहले हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मेडिकल कॉलेज लाने पर सिर में गंभीर चोट के साथ जंघे की हड्डी टूटी मिली। सिर की चोट का तो उपचार हो गया लेकिन टूटी हड्डी का इलाज नहीं हो पाया। सात मार्च तक आयुष्मान मरीजों के लिए सामग्री आपूर्ति बहाल नहीं हुई तब वह खुद को रेफर कराकर दूसरी जगह चले गए।
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केस दो
चोपन के कुरहुल निवासी रामा (70) 15 फरवरी से मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं। एक हादसे में उनके बाएं जांघ की हड्डी टूट गई थी। बेटा अनिल कुमार के मुताबिक कब तक ऑपरेशन होगा। इसकी अभी तक कोई तिथि निश्चित नहीं है। आयुष्मान कार्ड सेंटर जाने पर कहा जा रहा है कि अभी अनुमोदन नहीं आया है।

केस तीन::
करमा थाना क्षेत्र के ऐलाही निवासी आयुष्मान कार्ड धारक विजय कुमार यादव (40) पारिवारिक विवाद में हुई मारपीट में घायल हो गए थे। पांच मार्च को उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था। जांच में उनका दायां हाथ फ्रैक्चर पाया गया। अब ऑपरेशन कर रॉड लगाई जानी है। कच्चे प्लास्टर वाली हालत में वह हाथ के ऑपरेशन की बारी आने का इंतजार कर रहे हैं।
ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले खराब उपकरणों के भी बदले जाने का इंतजार
सिर्फ आयुष्मान वाले मरीजों के लिए किया जाना भुगतान ही ठप नहीं पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक तो ऑपरेशन में प्रयुक्त होने वाले कई उपकरण भी खराब हो गए हैं। समय-समय पर इन्हें दुरुस्त और बदलने का काम किया जाना चाहिए लेकिन यह कार्य भी लगभग एक साल से ठप होने की बात कही जा रही है।
एक साल से नहीं दिया गया उपयोगिता प्रमाण पत्र
सिर्फ आयुष्मान की धनराशि भुगतान में ही लापरवाही नहीं बरती जा रही, सीएमओ कार्यालय से स्टेट हेल्थ एजेंसी को प्रति तीन महीने पर उपलब्ध कराया जाने वाला उपयोगिता प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहे हैं। जिले के आयुष्मान का प्रभार देख रहे डाॅ. दिनेश बताते हैं कि पिछले एक साल से विवरण नहीं दिया गया है। इसके लिए पत्र तो जारी किए गए हैं, व्हाटसएप ग्रुप में भी कई बार मैसेज किया जा रहा है।

मुझे हाल में ही चार्ज मिला है। दो दिन पहले एचओडी के जरिये इसकी जानकारी हुई तो एकाउंटेंट से अविलंब लंबित भुगतान करने और आयुष्मान कार्ड से मिलने वाली उपचार सुविधा को सुचारू करने के निर्देश दिए गए। एक साल तक भुगतान रोकना गंभीर मसला है। मंगलवार तक सुधार न होने पर कार्रवाई के लिए चेताया गया है। - प्रो. आनंद, कार्यवाहक प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज।
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आयुष्मान मरीजों के इलाज के क्रम में कितनी क्लेम की गई धनराशि प्राप्त हुई और कितना खर्च हुआ, इसका प्रति तीन महीने पर विवरण उपलब्ध कराना होता है। इसके लिए कई बार संबंधितों को पत्र जारी करने के साथ ही मैसेज किए जा चुके हैं लेकिन लगभग एक साल से कोई विवरण (उपयोगिता प्रमाणपत्र) उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। फिर से पत्र जारी किया जा रहा है। -डॉ. पंकज कुमार राय, सीएमओ।
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अप्रैल से अब तक की गई आपूर्ति का उनकी फर्म को कोई भुगतान नहीं दिया गया है। इस अवधि में वह लगभग 25 लाख की आपूर्ति कर चुके हैँ। बिल बाउचर देने के साथ ही कई बार अनुरोध के बाद भी जब भुगतान प्राप्त नहीं हुआ तब विवश होकर आपूर्ति ठप करने का फैसला लेना पड़ा। - राकेश दुबे, निदेशक, शुभमेट प्राइवेट लिमिटेड।

ऑपरेशन की बारी का इंतजार करते मरीज। - संवाद

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