शक्तिनगर। एनसीएल खड़िया कोयला परियोजना में सोमवार दोपहर गल्टीलेयर ब्लास्ट के जरिए एक साथ ओवर बर्डेन (ओबी/ अधिभार) के साथ कोयले के मलबे को उड़ा दिया गया। देश के खुली कोयला खदानों में हुआ प्रयोग सफल होने से इस टीम में शामिल अधिकारियों के चेहरे पर प्रसन्नता दौड़ गई।
अब तक खुली कोयला खदानों में ओबी व कोयले की मोटी परत को तोड़ने के लिए अलग-अलग ब्लास्ट कराना होता था। नई तकनीकी के कामयाब होने से इस मद में आ रहे भारी भरकम खर्च के साथ समय की बचत होगी और पर्यावरण संरक्षित होगा। खड़िया में यह प्रयोग क्षेत्रीय महाप्रबंधक एमके प्रसाद की मौजूदगी में किया गया। इस मौके पर एनसीएल के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। पहले ड्रिल से होल बनाए गए और उसमे विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित किए गए मात्रा के मुताबिक बारूद की भराई की गई। इसके बाद आधुनिक तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रानिक/ डिजिटल डेटोनर्स और स्मार्ट डिवाइस के सहयोग से ब्लास्ट करा दिया गया। ब्लास्ट से करीब 28 मीटर मोटा पहाड़ का पथरीला मलबा व 12 मीटर मोटी कोयले की परत एक साथ बिखर गई। इस तकनीक के इस्तेमाल से ओबी व कोयला ब्लास्ट के बाद भी अलग-अलग रहा। एनसीएल के प्रवक्ता सीरज कुमार सिंह ने बताया कि यह तकनीक कोयला क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
एक कार्य के फायदे अनेक
सिंगरौली। नई तकनीक की जानकारी देते हुए आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रोफेसर एके मिश्रा ने बताया कि यह तकनीक कोयला उद्योग को भारी भरकम खर्च से उबारने का काम करेगी। उनका कहना था कि इसमें समय के साथ विस्फोटक की खपत कम होगी व पर्यावरण के लिए मुफीद साबित होगी।
सीएमडी की पहल पर सीआईएल की मुहर
सिंगरौली। नई तकनीक के लिए एनसीएल के सीएमडी पीके सिन्हा ने रुचि दिखाई थी। इसी के बाद कोल इंडिया लिमिमटेड (सीआईएल) ने मल्टीलेयर स्ट्रेटा ब्लास्ट आफ ओवर बर्डेन एंड कोल के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी। तकनीक के सफल परीक्षण से अधिकारियों में प्रसन्नता साफ दिखाई पड़ी। प्रवक्ता सीरज सिंह ने बताया कि खड़िया से एक दिन पहले निगाही क्षेत्र के खदान में इसी तरह ब्लास्ट किया गया था लेकिन वहां कोयले की परत मोटी व ओबी की पतली थी। खड़िया में इसके ठीक उलट ब्लास्ट के सफल होने के बाद अन्य कोयला क्षेत्रों में प्रयोग का दायरा बढ़ेगा।