जनपद में हर वर्ष कृषि योग्य भूमि के क्षेत्रफल में इजाफा तो हो रहा लेकिन समय से बरसात न होने व सिंचाई का संसाधन न होने से बोआई पर असर पड़ रहा है। कृषि विभाग के पांच वर्ष के आंकड़े तो यही बयां कर रहे लेकिन किसानों का कहना है कि सिंचाई संसाधनों का टोटा, इंद्रदेव की बेरूखी व बीज व खाद मिलने में दुश्वारी के चलते उनका कृषि की तरफ से मोह खत्म होता जा रहा है। जिसकी वजह से कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल घटता जा रहा है।
सोनांचल में किसानों ने खरीफ की बोआई की तैयारी शुरू कर दी है। धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, अरहर, तिल व मूंगफली की खेती की तैयारी की जा रही है। धान की खेती के लिए किसान आसमान की तरफ टकटकी लगा बैठे हैं। अभी तक इतनी वर्षा नहीं हुई है कि धान की नर्सरी भी डाली जा सके। यह दीगर बात है कि जिन किसानों के पास पानी का संसाधन मौजूद था वे धान की नर्सरी डालकर बारिश होने का इंतजार कर रहे है। धान की रोपाई के लिए खेत तैयार है लेकिन बरसात न होने से तमाम किसान खेत को खाली ही छोड़ देते है, जिसके कारण बोआई का क्षेत्रफल घट जाता है। जिले का कुल क्षेत्रफल 6.81 लाख हेक्टेयर है जबकि यहां कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल 1.92 लाख हेक्टेयर है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014-15 में रबी की फसलों की खेती 1.11 लाख हेक्टेयर व खरीफ की फसलों की खेती 75729 हेक्टेयर मेें हुई थी। वर्ष 2015-16 में रबी की फसलों की खेती का लक्ष्य 1.12 लाख हेक्टेयर रखा गया था लेकिन बरसात न होने की वजह से महज 90278 हेक्टेयर ही खेती हो सकी थी। वहीं इस वर्ष खरीफ 74130 हेक्टेयर में खेती हुई थी। वर्ष 2016-17 में रबी में 1.11 लाख व खरीफ में 74286 हेक्टेयर, वर्ष 2017-18 में रबी में 1.32 लाख हेक्टेयर व खरीफ में 76442 हेक्टेयर में खेती हुई थी। चालू वर्ष 2018-19 में खरीफ के फसलों की खेती 85572 हेक्टेयर में की जानी है।
कोट-
जिले में कृषि योग्य भूमि में हर वर्ष कुछ न कुछ इजाफा हो रहा लेकिन सिंचाई का संसाधन कम होने, बरसात न होने के चलते बोआई नहीं हो पाती। जिसकी वजह से उपज कम होती है। - पीयूष राय, जिला कृषि अधिकारी, सोनभद्र।
इनसेट में...
जनपद का कुल क्षेत्रफल : 6.81 लाख हेक्टेयर
कृषि योग्य भूमि : 1.92 लाख हेक्टेयर
रबी में बोआई का क्षेत्रफल (लगभग) : 1.10 लाख हेक्टेयर
खरीफ में बोआई का क्षेत्रफल (लगभग) : 75 हजार हेक्टेयर।