पिछले सत्र में हुई कम बारिश के चलते तपिश के मौसम से पहले ही पानी के लिए हायतौबा मचनी शुरू हो गई है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने जहां अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं संकटग्रस्त गांवों की सूची तैयार करवाने का भी काम शुरू कर दिया गया है। डीएम पीके उपाध्याय ने जल निगम के एक्सईएन से ऐसे गांवों की सूची भी तलब भी कर ली है। ताकि संबंधित गांवों के बाशिंदों को टैंकर एवं अन्य माध्यमों से पेयजल मुहैया कराया जा सके।
जिले का अधिकांश क्षेत्रफल पहाड़ों और जंगलों से अच्छादित होने के कारण गर्मी का आगाज होते ही हैंडपंपों और कूपों का जलस्तर तेजी से नीचे खिसकने लगता है। जनवरी माह मेें राबर्ट्सगंज ब्लॉक के सिंधोरा, कूरा, मुसही के चरका टोला, सुकृत खानेआजमपुर, नागनार हरैया, मधपुर के झपरी, कोयलहरिया, मझुई, मुबारकपुर, बघोर समेत अन्य गांवों में तेजी से जलस्तर नीचे खिसक रहा है। घोरावल ब्लॉक के सतौहा, नेवारी, भरौली, पाती, बंधा, डोमखरी, खिरिहटा, बेलवनिया, करौंदिया, केवटा, सिरसाई, छाईन, नौगवां नंदलाल, खुटहा, बिसरेखी, मिझुन पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। कई हैंडपंप लाल पानी उगल रहे हैं। सबमर्सिबल भी जवाब देने लगेे है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन को हैंडपंपों का रिबोर कराने के मांगपत्र दिया है, लेकिन अभी तक एक भी हैंडपंपों का रिबोर नहीं हुआ है। यहीं हाल चोपन, म्योपुर, चतरा, नगवां, बभनी और दुद्धी ब्लॉक के पहाड़ी क्षेत्रों केे गांवों का है। हालांकि जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को पेयजल संकट से निजात दिलाने की कवायद शुरू कर दी है। जिलाधिकारी प्रमोद कुमार उपाध्याय का कहना है कि जल निगम के एक्सईएन को अविलंब जिन गांवों में गर्मी के दिनों में पानी की समस्याएं होती है उनकी सूची तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।