केंद्र और प्रदेश सरकार जहां विद्यालयों में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की कवायद में जुटी हुई है। वहीं जिले के दर्जनों विद्यालयों में बच्चे पानी के लिए परेशान हो रहे। 450 ऐसे विद्यालय हैं जहां हैंडपंप खराब हैं। बच्चे पानी के लिए परेशान हो रहे। प्यास बुझाने के लिए उन्हें प्रदूषित पानी का सहारा लेना पड़ रहा। इससे बच्चों पर बीमारी का भी खतरा मंडराने लगा है। स्वच्छता अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय में पानी की उपलब्धता करने के निर्देश तो हैं ही, बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जरूरत अनुसार आरओ लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है। शासन ने 14वें वित्त से खराब हैंडपंपों की मरम्मत का फरमान भी जारी किया है। बावजूद हालत यह है कि जिले में स्थापित 2664 बेसिक परिषदीय विद्यालयों में 164 विद्यालय अभी तक हैंडपंप विहीन हैं। हैंडपंप स्थापना वाले विद्यालयों में 450 ऐसे स्कूल हैं, जहां हैंडपंप खराब हो चुके हैं। विभागीय रिकार्ड में भी कई विद्यालयों में हैंडपंप खराब रहने की बात स्वीकारी जा रही है। नए हैंडपंप की स्थापना और रिबोर का प्रस्ताव भी बनाया गया है,लेकिन इस पर अमल कब तक होगा, यह कहना अभी मुश्किल है।
मुख्यालय से सटे प्राथमिक विद्यालय लोढ़ी द्वितीय में हैंडपंप तीन महीने से खराब है। शिक्षिका रजनी सिंह ने बताया तीन साल पहले यहां लगे आरओ का भी अब तक संचालन शुरू नहीं किया गया है। पास की बस्ती में भी पानी का संकट है। बच्चों को कहा जाता है कि बोतल में पानी लेकर आएं। कमोबेश यहीं हालात इस ब्लाक के कई अन्य विद्यालयों की भी हैं।
वैनी-खलियारी: नगवां ब्लाक के रतुआ प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, कजियारी प्राथमिक विद्यालय, बांकी प्राथमिक विद्यालय सहित अन्य विद्यालयों में हैंडपंप जवाब दे चुके हैं। इससे बच्चों को पढ़ाई बीच में छोड़कर तपती धूप में पानी के लिए जाना पड़ता है। बभनी: प्राथमिक विद्यालय भाठीमहुआ में लगा हैंडपंप लंबे समय से खराब है। बच्चों को प्यास बुझाने के लिए पांच सौ मीटर दूर स्थित कुएं पर जाना पड़ता है।
शिक्षक शंभू प्रसाद, मंजू देवी, मीना देवी का कहना था कि संबंधितों को इसकी सूचना कई बार दी जा चुका है। गड़वान प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय बैगानी टोलाआजनगीरा पर हैंडपंप ही नहीं हैं। आसनडीह: यहां के पुरानी बस्ती स्थित प्राथमिक विद्यालय और म्योरपुर: क्षेत्र में 28 विद्यालय हैंडपंप विहीन है।