सोनभद्र। जिले में शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने या देवी सर्व भूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: मंत्र के साथ प्रथम आराध्या देवी मां शैलपुत्री का पूजन-अर्चन किया। मां के भक्तों ने विधि-विधान से मंदिरों और घरों में कलश की स्थापना की। राबट्र्संगंज नगर में शीतला मंदिर, डाला के वैष्णो मंदिर, शक्तिनगर की ज्वालामुखी समेत अन्य मंदिरों में पूजन-अर्चन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
भोर चार बजे से राबट्र्सगंज नगर में स्थित मां शीतला मंदिर, सातो शीतला मंदिर, कड़े शीतला मंदिर, काली मंदिर, मां दुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजर्न-अ्चन करने के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। पुजारियों ने भव्य आरती करने के बाद मंदिरों का पट खोला। शीतला मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। एएसपी अरुण कुमार दीक्षित, सीओ विवेकानंद तिवारी समेत अन्य अधिकारी मंदिरों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। डाला: वैष्णो मंदिर में जिले के अलावा झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के कई जिले से श्रद्धालु मां वैष्णो देवी की पूजा-अर्चना की।
आसनडीह: नवरात्र के पावन पर्व पर गांव के हर एक घरों में नौ दिन तक पूजा पाठ ब्रत उपवास के लिए जुटे श्रद्धालुओं ने नवरात्र केे पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना कर पूजा पाठ किया।
घोरावल। शिवद्वार स्थित उमामहेश्वर मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों की भीड़ रही। घोरावल नगर में दुगा मंदिर, काली मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, श्रीराम जानकी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर समेत तमाम मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिरों में आदिशक्ति माता भगवती को नारियल, चुनरी व प्रसाद चढ़ाकर मनोकामना पूर्ण करने की प्राथज्ना की। बड़ी संख्या में माता के भक्तों ने अपने घरों में कलश स्थापना कर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की। बहुत से भक्तों ने नौ दिन के व्रत का संकल्प लिया, तो बड़ी संख्या में भक्तों ने नवरात्र के प्रथम दिन व्रत रखा।
शारदीय नवरात्र प्रथमा तिथि को शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर पर भक्तों एवं दर्शनार्थियों की लंबी कतार भोर मंगला आरती के बाद से शुरू हो गई थी। गर्भगृह दर्शनार्थियों के सुविधा पुजारी परिवार के पंडित हरिओम मिश्रा, प्रमोद मिश्रा, भैया राम मिश्रा, रामाधार मिश्रा, राम प्रताप मिश्रा, वेदांती मिश्रा एवं अन्य सदस्य व्यवस्थाओं में लगे रहे। मंदिर समिति के सचिव पंडित राम जन्म मिश्र ने बताया कि पुजारियों को तीन पाली में दर्शन कराने एवं मंदिर पूजन सिंगार आरती के लिए तैनात किया गया है।
नगवां ब्लाक के सिलहट के जंगल में स्थित मां पिपरहवा देवी की महिमा अद्भुत है सैकड़ों वषज् पुरानी प्रतिमा का चमत्कार यह है कि यहां किसी तरह की बलि जीवों की नहीं दी जाती है यहां नारियल और मिठाई ही चढ़ाई जाती है। अगल- बगल के गांवों में चेचक निकलने पर लोग देवी के यहां से जल ले जाकर लगा देते हैं तो ठीक हो जाता है। पनिकप कलां गांव के बुजुर्ग रूद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जब 1914 मे सिलहट बांध का निर्माण हो रहा था तो उसमें हमेशा बाधाएं आ जाती थी तो ब्रिटिश शासन के अधिकारी परेशान हो गए। तब क्षेत्र के लोगों की सलाह पर देवी की पूजा कराने पर निर्माण पूरा हो सका।