रामगढ़। नगवां ब्लॉक के सिलहट जंगल में विराजमान पिपरहवा देवी सबका कष्ट दूर कर देती है। सैकड़ों वर्ष पुरानी पिपरहवा देवी की प्रतिमा है। यहां पूजन-अर्चन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
घनघोर जंगल में विराजमान पिपरहवा देवी की महिमा अपरंपार है। यहां जो भी मत्था टेकता है उसकी सभी समस्याएं दूर हो जाती है। इसलिए यहां भक्त हमेशा पूजा करने के लिए पहुंचते है। नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। पनिकप कला गांव के रहने वाले बुजुर्ग रूद्र प्रताप सिंह (95) ने बताया कि ब्रिटिश शासन काल में 1914 में सिलहट बांध का निर्माण हो रहा था। लेकिन बांध में जब भी काम शुरू होता था तो कोई न कोई समस्या उत्पन्न हो जाती थी। इससे ब्रिटिश शासन के अधिकारी परेशान हो गए थे। क्षेत्र के कुछ लोगों ने अधिकारियों को सलाह दिया कि वे पिपरहवा देवी का पूजा कराए तो काम के दौरान आने वाली समस्याएं दूर हो जाएगी। लोगों की बातें मानकर अधिकारियों ने पूजन-अर्चन करवाया तब जाकर बांध का निर्माण कार्य पूण हुआ। ग्रामीणों ने कई बार पिपरहवा देवी का मंदिर निर्माण कराने का प्रसास किया, लेकिन देवी मां स्वप्र में आकर मंदिर बनाने से मना कर देती है।