अनपरा । ऊर्जांचल में कई स्थानों पर पेयजल की किल्लत झेल रहे लोग खासे परेशान हैं। भाट क्षेत्र के लोगों को काफी दूर से पानी लाकर प्यास बुझाना पड़ रहा है । ऐसे लोग बरसात होने का इंतजार कर रहे ताकि जलस्तर बढ़े और उनकी परेशानी दूर हो सके ।
ऊर्जांचल इस समय भयावह पानी संकट से जूझ रहा है। पानी के अभाव में कई मवेशियों की जान भी जा चुकी है और हालात सुधरने के आसार नहीं दिख रहे हैं। अनपरा के भाट क्षेत्र के हालात कुछ अधिक खराब हैं। लोग आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि झमाझम बरसात हो और उनकी पानी की समस्या दूर हो सके। रिहंद जलाशय पर आश्रित परियोजनाओं के जिम्मेदार भी अपने विस्थापित गांव के लोगों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हुए हैं। पिछले कई सालों से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन शासन व प्रशासन भी इससे निपटने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। स्थाई हल खोजने की कोशिश ही नहीं की जा रही है।
भूजल का गिरता स्तर
उर्जांचल में लगातार भूजल स्तर गिरता जा रहा है। हैडंपंपों, कूपों व तालाबों में गर्मियों में धूल उड़ने लग रही है। नदियों का भी पानी सूख जा रहा है और जिस नदी में थोड़ा बहुत पानी है वह प्रदूषित है। जिसकी वजह से पानी की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। आने वाले दिनों में पानी का यह संकट कम होने वाला नहीं है। जानकारों का कहना है कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या, बढ़ता औद्योगिकीकरण, फैलते शहरीकरण के अलावा ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न जलवायु परिवर्तन इसके लिये जिम्मेदार हैं। ग्राम पंचायत कुलडोमरी के कई टोलों में पानी की किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है। एक दो स्थानों पर चुआड़ के दूषित पानी से लोग प्यास बुझाने को मजबूर हैं।