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गेट मीटिंग, जुलूस के जरिए दिखाई ताकत, लगाए नारे

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अनपरा। सीएमपीएफ का विलय न करने का लिखित पत्र जारी करने, दसवां वेतन समझौता शीघ्र लागू करने, ओवरटाइम पर लगाई जा रही पाबंदी वापस लेने आदि की मांग को लेकर शनिवार को जनजागरण के जरिए कामगारों ने आवाज बुलंद की। ककरी, बीना, खडिय़ा, जयंत, दुधीचुआ सहित सभी जगह सुबह गेट मीटिंग कर नारे लगाए गए और शाम को जनजागरण जुलूस निकालकर एकजुटता का प्रदर्शन किया गया। उधर, पुलिस ने यूनियन पदाधिकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं परियोजना प्रबंधन के लोग हड़ताल टालने की अपील करते रहे।
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बीना में सुबह गेट मीटिंग के बाद शाम को दुर्गा मंडप से जुलूस निकाला गया। ट्रेड यूनियन के रघुनाथ सिंह, मनोज सिंह, इंद्रजीत पांडेय, व्यासमुनी पाठक, संजीव कौशल, डीडी उपाध्याय त्रिभुवन सिंह, मिथिला सिंह पटेल, संजय पासवान, दिनेश दुबे आदि ने आवाज बुलंद की। खड़िया में ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ सीटिया के एनसीएल जोन महासचिव बीके पटेल ने जुलूस की अगुवाई की। ककरी में बीएमएस के शंभू सिंह, एचएमएस के यूपी सिंह, सीएमएस के टीबी पटेल, आरसीएसएस के बनारसी, सीटिया के जितेंद्र वर्मा, संजय सिंह आदि ने आवाज उठाई। इसी तरह जगह-जगह बीएमएस के वाईएन सिंह, इंटक के आदित्य मिश्रा, एचएमएस के अशोक पांडेय, एटक के अशोक दुबे, आरसीएमएस के वीके मालवीय, सीटू के पीएस पांडेय आदि ने भी हुंकार भरी। सभी का कहना था कि केंद्र सरकार का रवैया किसी भी रूप में मजदूर हित में नहीं है। एक तरफ जहां ओवरटाइम पर पाबंदी लगाई गई। वहीं दूसरी तरफ दसवां वेतन समझौता अब तक लागू नहीं किया गया। शुक्रवार को दिल्ली में यूनियन प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में सीएमपीएफ के विलय का मसौदा न होने की जानकारी पर कहा कि जब तक सरकार इस बात को लिखित रूप में नहीं दे देती, तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता।
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