अनपरा। एनटीपीसी सिंगरौली की दो सौ मेगावाट वाली पहली, तीसरी और पांचवीं इकाई शनिवार की सुबह तकनीकी खामी के अचानक ट्रिप कर गई। वहीं दो दिन के अंतराल में ओबरा की पचास मेगावाट वाली दूसरी ब्वायलर ट्यूब लीकेज के चलते और दो सौ मेगावाट वाली ग्यारहवीं इकाई हाइड्रोजन गैस लीकेज के चलते ट्रिप कर जाने से शक्ति भवन तक खलबली मच गई। अभियंता एनटीपीसी सिंगरौली की इकाइयों को जहां रात तक पूरी क्षमता से उत्पादन पर लाने में लगे हुए थे। वहीं ओबरा की इकाइयों को बीस जून तक उत्पादन पर आने की उम्मीद जताई जा रही थी। इसको लेकर सिस्टम कंट्रोल को पीक ऑवर में महंगी बिजली खरीदकर हालात संभालने पड़े।
बता दें 14 अप्रैल से बिजली आपूर्ति के घंटों में बढ़ोत्तरी के बाद से ही जहां बिजली की अधिकतम मांग का आंकड़ा 17 हजार मेगावाट के पार बना हुआ है। वहीं अनपरा की पांच सौ मेगावाट वाली पांचवीं, ओबरा की पचास मेगावाट वाली पहली, सौ मेगावाट वाली सातवीं, दो सौ मेगावाट वाली बारहवीं, पारीक्षा की 110 मेगावाट वाली पहली, हरदुआगंज की साठ मेगावाट वाली पांचवीं, बजाज ललितपुर की छह सौ मेगावाट वाली पहली इकाई को लंबे समय के लिए अनुरक्षण पर है। कोयला किल्लत के चलते बारा की 660 मेगावाट वाली तीसरी और जनरेटर में दिक्कत के चलते इसी क्षमता की दूसरी इकाई बंद चल रही है। बजाज ललितपुर की भी 660 मेगावाट वाली पहली इकाई कोल फीडिंग की दिक्कत के चलते तेरह जून से ही बंद चल रही है। इसके चलते सस्ती बिजली की उपलब्धता को लेकर पहले से ही हायतौबा की स्थिति बनी हुई है। वहीं शनिवार को एनटीपीसी सिंगरौली की भी तीन इकाइयां अचानक ट्रिप होने से शक्ति भवन तक खलबली मच गई। सिस्टम कंट्रोल के मुताबिक मौसम की नरमी के चलते सुबह शाम तो राहत रही लेकिन दोपहर और रात में आपूर्ति बनाए रखने के लिए महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। हालात को देखते हुए अनपरा की पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी, छठवीं, सातवीं और लैंको की पहली और दूसरी इकाई से ज्यादा से ज्यादा उत्पादन लेने का प्रयास किया जाता रहा। उधर, अनपरा जीएम एके सिंह ने बताया कि बिजली जरूरत को देखते हुए उत्पादन पर चल रही इकाइयों से बेहतर उत्पादन बनाए रखने की कोशिश बनी हुई है। पांचवीं इकाई जल्द उत्पादन पर आ जाए, इसको लेकर भी हर संभव प्रयास जारी है।