सोनभद्र। जिले में वनाधिकार कानून लागू करने समेत अन्य मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन, वन एवं भू अधिकार अभियान के बैनर तले कई गांवों के ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। सरकार पर वनाधिकार कानून लागू करने में हीलाहवाली करने का आरोप मढ़ा। डीएम को मांग पत्र सौंप कर अविलंब वन भूमि पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक दिलाने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से जंगल की जमीन पर रह रहे लोगों ने वन अधिकार कानून 2006 के तहत अपने आवास और कृषि भूमि नाम कराने के लिए दावे पेश किए थे। लेकिन अधिकारियों ने उनके दावों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 17 राज्यों के सरकारों को निर्देशित किया है कि वह 12 जुलाई 2019 अपनी रिपोर्ट पेश करें, नहीं तो वनाश्रित लोगों को उनके निवास व रोजगार के साधन से उजाड़ दिया जाएगा, अगर ऐसा होता है तो भयावह स्थिति उत्पन्न होगी। कहा कि वनाधिकार कानून के तहत वन भूमि पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक सुनिश्चित करता है। इस ऐतिहासिक कानून का पालन करने का संपूर्ण अधिकार ग्राम सभा को निहित है। कहा कि सरकार वन भूमि पर रह रहे लोगों के विस्थापन को रोकने के लिए वन अधिकार कानून में दी गई जिम्मेदारी को निभाते हुए अध्यादेश जारी करें, ताकि विस्थापन की प्रक्रिया पर रोक लगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दाखिल कर मजबूती से वन अधिकार कानून के प्राविधानों को लागू करने हेतु परैवी करें। प्रदर्शन में सुकालू, राम लखन, जवाहर लाल, शीला, मुन्नर सिंह, अमरावती, गौरी, पानकुंवर, फूलरी, राजेंद्र, शिवकुमारी, महेंद्र, रामसेवक, सुरेश, रजिया आदि मौजूद रहीं।