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आजादी के इतिहास में अमर है शहीद उद्यान परासी

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सोनभद्र। आजादी के इतिहास में सदर ब्लॉक में स्थित शहीद उद्यान परासी अमर है। भारत छोड़ो आंदोलन में जिले के 40 सेनानियों ने सजा भुगती थी। यहां के युवकों ने 1932 में जब तिरंगा लहराने की घोषणा की थी तब अंग्रेजी हुकूमत ने उन पर घोड़े दौड़ा दिये थे, जिससे यहां की भूमि रक्तरंजित हो गई थी। आजादी के महानायक पं. महादेव चौबे के वंशजों ने शहीद उद्यान की निजी भूमि को सरकार को दान कर दिया है। हर साल यहां आजादी का जश्न स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर मनाया जाता है।
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अंग्रेजों भारत छोड़ो आदोलन में जनपद के कुल 40 सेनानियों को कठोर सजा भुगतनी पड़ी थी। अविभाजित मिर्जापुर का इस आंदोलन का गवाह बना जिले का शहीद उद्यान जो राबर्ट्सगंज-घोरावल मुख्य मार्ग पर स्थित है। स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक पं. महादेव चौबे के नेतृत्व में राजेश्वरी देवी, महावीर प्रसाद गुप्त, रामानंद पांडेय, कृष्णसेवक मिश्र, ब्रजभूषण देव पांडेय, बेनी माधव पांडेय, द्वारका प्रसाद, पंचकौड़ी खां, रामखेलावन गोसाईं, भागवत प्रसाद, इंद्रमणि, शंकर प्रसाद मांझी, विश्वनाथ मांझी, रघुवीरराम पाठक, रामनाथ पाठक, गनेश सिंह, किस्मत राम, राम मनोहर त्रिपाठी, रामस्वरूप, लक्ष्मी नारायण, सीताराम चौबे, रामप्रताप शुक्ला, अभिराज सिंह, राममनोहर सिंह, विष्णु शंकर मिश्र, लक्ष्मन सिंह, देवमुनि, रामेश्वर खैरवार, ठाकुर प्रसाद सिंह ने आजादी के जंग में साथ निभाया। राधा प्रसाद शर्मा, अली हुसैन, रामलखन त्रिपाठी, केशरी प्रसाद द्विवेदी, गुलाब दुबे, अंबिका प्रसाद शुक्ल, अवध बिहारी लाल, भगवती प्रसाद तिवारी, शिवललित सिंह, विश्वनाथ सिंह व हरिहर पाठक ने भी जेल की सजा भुगती। लेकिन अंग्रेजों का विरोध नहीं छोड़ा। आजादी के इतिहास में शहीद उद्यान इसलिए भी अमर हो गया कि 1941 का व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत इसी स्थान से हुई।
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