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Sonebhadra News: निजी स्कूलों में खाली रह गईं आरटीई की 2603 सीटें

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गरीब परिवार के बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला नहीं हो पा रहा। चालू सत्र में इस श्रेणी की 60 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं। चार चरणों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी सिर्फ 1503 बच्चों का ही दाखिला हुआ है।
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बेरुखी की वजह योजना के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों के प्रति स्कूलों का खराब रवैया है तो दूसरी ओर शासन से भी उनकी फीस के एवज में मिलने वाली धनराशि समय से न आना भी बड़ी वजह है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आरक्षित की गई हैं।
इन सीटों पर गरीब परिवार के बच्चों का दाखिला होना है। जिले में 459 विद्यालयों में 4113 सीटें आरक्षित की गई हैं। शिक्षण सत्र 2025-26 में इन सीटों पर प्रवेश के लिए दिसंबर से ही प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इस चरण में 1451 ऑनलाइन आवेदन हुए थे। सत्यापन के बाद 1404 आवेदन सही पाए गए।
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इसमें 805 बच्चों का लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया। रिक्त सीटों के लिए जनवरी, फरवरी और मार्च में तीन चरण चलाए गए, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अब तक सिर्फ 1503 सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है। चारों चरणों में करीब 979 बच्चों का आवेदन अस्वीकृत हुआ है। अभी भी 2603 सीटें खाली पड़ी हैं।

आ रहीं ये दिक्कतें
आरटीई के तहत आरक्षित सीटों पर प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस का भुगतान सीधे सरकार संबंधित स्कूलों को करती है। इन बच्चों को यूनिफॉर्म व कॉपी-किताब की धनराशि भी स्कूलों की दी जाती है। यह प्रक्रिया नियमित नहीं है। पिछले सत्र में 2735 बच्चों का दाखिला हुआ था। इनके यूनिफॉर्म व कॉपी-किताब का 1.36 करोड़ और फीस का 1.39 करोड़ रुपये का भुगतान स्कूलों को नहीं हुआ है। इसके चलते निजी स्कूल भी बच्चों के दाखिले में कोई न कोई बहाना बनाकर खारिज कर देते हैं। दूसरी ओर अभिभावकों का रूझान भी प्रमुख स्कूलों में दाखिले के प्रति ज्यादा रहता है, जबकि वहां सीटें सीमित होती हैं। ऐसे में मनचाहे स्कूल में प्रवेश न मिलने पर वह दूसरी ओर रूख कर लेते हैं।

प्रचार- प्रसार भी रहा कम
आंकड़ों पर गौर करें तो आरटीई के तहत आरक्षित सीटों पर दाखिले के लिए पहले चरण में तो विभाग की ओर से खूब प्रचार प्रचार किया गया। इससे अभिभावक और बच्चे आकर्षित हुए। आवेदनों की संख्या भी अधिक रही। इसके बाद के चरणों के प्रति विभाग भी बेपरवाह हो गया। नतीजा आवेदन लगातार घटते चले गए।
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