सोनभद्र। जिले में लंबे समय से बंद पड़ी पेयजल परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिले की 25 पुरानी एकल और ग्राम समूह पेयजल परियोजनाओं की मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। परियोजनाओं के दुरुस्त होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को नियमित पेयजल आपूर्ति का लाभ मिलने की उम्मीद है।
जिले में कुल 1379 गांव में से 82 गांव जल निगम की पुरानी योजनाओं से जुड़ी हैं। शासन की तरफ से पुरानी परियोजनाओं का मरम्मत कराते हुए पुन: संचालित करने के लिए अब तक करीब तीन करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। परियोजनाओं की मरम्मत और पेयजल आपूर्ति बहाल करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था नालंदा इंजीकॉन को सौंपी गई है। इसके तहत पानी की टंकियों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों को सही करने, नई पाइपलाइन बिछाने और खराब मशीनों को दुरुस्त करने का काम कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कुल 26 पुरानी पेयजल परियोजनाएं हैं। इसमें विंढमगंज एकल पेयजल परियोजना का कार्य नए सिरे से कराया जाना है। जबकि शेष 25 परियोजनाओं पर मरम्मत का काम चल रहा है। लंबे समय से कहीं पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने तो कहीं टंकी और मशीनों में खराबी के कारण इन परियोजनाओं से पेयजल आपूर्ति प्रभावित थी। अधिकारियों के अनुसार कुड़ारी, पड़रक्ष समेत तीन परियोजनाओं का काम लगभग पूरा हो चुका है।
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वर्जन:
जिले में 25 पेयजल परियोजनाओं के मरम्मत का कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं से जुड़े 61 गांवों में वर्तमान में आंशिक रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जबकि सात गांवों में परियोजना का कार्य पूरा होने के बाद पूर्ण रूप से पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है। जैसे-जैसे शासन से बजट मिल रहा है, वैसे मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। - जसवंत सिंह, सहायक अभियंता-जल निगम ग्रामीण।