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अधर में लटकी पड़ी हैं आधा दर्जन सिचाई परियोजनाएं

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जिले में बारिश आधारित कृषि से निजात के लिए कई सिंचाई परियोजनाएं तैयार हुईं थीं। लेकिन ज्यादातर अधर में लटकी हैं। पूर्व सपा सरकार में घोरावल करीब 376 करोड़ रुपये की छह सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। उन पर काम ही शुरू नहीं हो सका। महज कुसम्हा लिफ्ट कैनाल और शाहगंज नहर में रिमॉडलिंग का कार्य चल रहा। अगर यह सिंचाई परियोजनाएं बन जातीं तो क्षेत्रीय किसान खुशहाल हो जाते।
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घोरावल इलाका कृषि प्रधान क्षेत्र है। इलाके के 9े0 फीसदी परिवार प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से खेती पर निर्भर हैं। लेकिन किसान बारिश आधारित कृषि पर निर्भर रहते हैं। सपा सरकार में करीब 376 करोड़ रुपये की विभिन्न सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत हुईं। कई अन्य नई, पुरानी सिंचाई परियोजनाओं पर भी कार्यवाही शुरू की गई। इनमें मुडिलाडीह लिफ्ट कैनाल, धरसड़ा लिफ्ट कैनाल, सोन लिफ्ट कैनाल, शाहगंज रजवाहा, धोवा पंप नहर प्रणाली के पुनर्स्थापन परियोजना, रैया बंधी, कुसुम्हा लिफ्ट कैनाल परियोजनाएं शामिल हैं। इनके पूर्ण होने से शिवद्वार क्षेत्र, गुरुवल, शाहगंज इलाके के बंधा, बरौली, पाती, गुरेठ, धरसड़ा, मरसड़ा, मुडिलाडीह, शाहगंज, राजपुर, कुसुम्हा समेत सैकड़ों गांवों के किसानों को लाभ मिलता। लेकिन नई सरकार बनने के बाद इनमें से अधिकांश योजनाओं का कोई अता पता नहीं है। इस समय मात्र कुसुम्हा लिफ्ट कैनाल व शाहगंज नहर में रिमॉडलिंग का काम चल रहा है।
मुडिलाडीह लिफ्ट कैनाल का दो बार शिलान्यास भी हो चुका है। लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका। संत कुमार बैसवार, पन्नालाल, कुंज बिहारी, यशपाल, दिलीप मिश्रा, रामसूरत चौधरी का कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण हो जाता तो क्षेत्र में खुशहाली आती। उन्होंने यूपी सरकार से विशेष सिंचाई पैकेज और लंबित परियोजनाओं के निर्माण की मांग की है।
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कोट
पिछली सरकार में कुछ सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है, इसकी जानकारी फिलहाल नहीं है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसकी जानकारी ली जाएगी। बजट के अनुसार परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेज कराया जाएगा।
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रामाश्रय, मुख्य विकास अधिकारी
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