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प्रदूषण की मार से कराह रहे ग्रामीणो का फूटा गुस्सा

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अनपरा। प्रदूषण की मार से कराह रहे अनपरा गांव के निवासियों का गुस्सा बृहस्पतिवार को फूट पड़ा। ग्रामीणों ने परियोजनाओं से उड़ रही धूल व कोयले की डस्ट पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
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अनपरा गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की दिशा में रोक लगाए जाने की एनजीटी की पहल सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अनपरा गांव में विगत कई वर्षों से अनपरा तापीय परियोजना व लैंको परियोजना द्वारा राख व कोयले का डस्ट उड़ाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण शत-प्रतिशत प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण का आलम यह है कि लोग का जीना मुहाल हो गया है। सांस लेने पर नाक व मुंह से कोयले के कण निकल रहा है। हवा चलने पर कोयले की डस्ट से दिन में भी अंधेरा छा जा रहा है। प्रदूषण से गांव के नागरिक चर्म रोग, सांस, दमा, खांसी, एजर्ली, टीबी, कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण रोकने की दिशा में ग्रामीणों ने कई बार पत्राचार किया परंतु औद्योगिक इकाईयों की चिमनियों व सीएचपी से उड़ रही कोयले की डस्ट व राख पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। अति प्रदूषित क्षेत्रों में शुमार होने के बाद भी संबंधित अधिकारी अपने कर्तव्यों से उदासीन बने हुए हैं, जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे। इस अवसर पर सुदर्शन सिंह, मो. जलील खान, मोती चंद यादव, लाल बाबू, नीरज सिंह, अमित सिंह, बिजेंद्र सिंह, बालेंद जायसवाल, धनराज भारती, श्याम मिलन आदि मौजूद थे।
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