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छह साल में बढ़ गई छह लाख आबादी

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सोनभद्र। जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए सरकारें तमाम उपाय कर रही हैं। लेकिन जागरूकता की कमी से जनसंख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जिले में पिछले छह साल में आबादी में करीब छह लाख का इजाफा हुआ है। वर्ष 2011 की सेंसेस रिपोर्ट के अनुसार जिले की आबादी 14 लाख 63 हजार 565 थी, जो अब बढ़कर करीब 20 लाख हो गई है। प्रति दंपती सकल प्रजनन दर भी वर्तमान में 3.8 फीसदी है, जिसे कम कर 2.1 फीसदी पर लाने का लक्ष्य है। बढ़ती आबादी जनसंख्या नियंत्रण की सारी कवायदों को धता बता रही है।
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परिवार सीमित रखने के लिए तमाम कवायदें की जा रही हैं। शासन से लेकर स्वास्थ्य महकमा तक समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम के साथ ही नसबंदी कैंप का आयोजन कराता है। करीब-करीब हर वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस पर जागरूकता पखवाड़ा मनाया जाता है, इन सबके बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी से लगातार आबादी में इजाफा हो रहा है। वर्ष 2011 की जनगणना में करीब साढ़े 14 लाख की आबादी थी, जो महत छह साल में ही बढ़कर करीब 20 लाख हो गई। सीएमओ डा.एसकेजी सिंह कहते हैं कि छह साल में करीब छह लाख जिले की आबादी बढ़ी है। बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए मंगलवार से 24 जुलाई तक जिले में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत एक रथ निकाला जाएगा, जिसे सारथी नाम दिया गया है।17 हजार पंफलेट बांटे जाएंगे। जागरूकता के लिए आशाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है। नसबंदी कैंप लगेंगे। उन्होंने बताया कि प्रति दंपती सकल प्रजनन दर 3.8 फीसदी है जिस कम करके 2.1 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले दस साल से प्रति हजार पर 28 बच्चों का जन्म हो रहा है।

प्वाइंटर
: वर्ष 2011 जिले की आबादी 14 लाख 63 हजार 565 थी।
: स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 2017 तक 20 लाख हो गई आबादी।
: प्रति दंपती सकल प्रजनन दर 3.8 फीसदी, जिसे कम कर 2.1 फीसदी पर लाने का लक्ष्य।
: पिछले दस साल से प्रति हजार पर 28 बच्चों का जन्म हो रहा है।
जनसंख्या दिवस से जुड़ी खबर.....
बड़ा परिवार बन गया विकास में रोड़ा, दुश्वारियां
सोनभद्र। राबर्ट्सगंज में एक ऐसा परिवार है, जिसमें नौ सदस्य हैं। इस नाते यह परिवार अब तक विकास नहीं कर पाया और तमाम दुश्वारियों से जूझ रहा है। बढ़ती महंगाई में परिवार के लोगों को हर तरह की परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। परिवार के सदस्यों की बातों पर गौर करें तो पिता की कम आय के नाते सही से पालन पोषण नहीं हो सका। यहां तक की शिक्षा ग्रहण करने में परेशानी हुई। फीस जमा करने तक के लिए पैसों का अभाव हो गया। इससे पूरा परिवार महज आजीविका चलाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। कभी-कभी बड़ा परिवार होने का मलाल भी होता है लेकिन अब जो परेशानियां हमने खुद पैदा की हैं, उससे पूरे परिवार को मिलकर ही निबटना होगा।
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बेटा-बेटी हैं खुशहाल, पढ़ाई पर पूरा ध्यान
सोनभद्र। एक ओर जहां बढ़ती जनसंख्या समाज में अभिशाप बन रही है, वहीं कम सदस्यों वाले परिवार अपने को काफी खुशहाल महसूस करते हैं। ऐसा ही एक परिवार है, जिसमें महज चार सदस्य हैं। खास बात यह है कि पति-पति दोनों किसी न किसी नौकरी में हैं और बेटा-बेटी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दंपती का कहना है कि सीमित परिवार होने के नाते वे अपने दोनों बच्चों का अच्छी तरह से पालन-पोषण कर रहे। उनकी बेतहर शिक्षा पर ध्यान दे रहे हैं। कहा कि ज्यादा संख्या वाले परिवारों की परेशानियों को देखते हुए उन्होंने सिर्फ दो बच्चे पैदा करने का निर्णय लिया और उनका यह निर्णय उनके लिए सुखदायी है।
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