बभनी (सोनभद्र)। कस्बा मंडी के परिसर में जलसा-ए-हिंद-वली कांफ्रेंस शुक्रवार की रात हुआ। इसमें मशहूर शायरों के नातिया कलाम व खतीबो इमाम के बेहतरीन तकरीरों से लोग पूरी रात इश्के रसूल में झूमते रहे। लोगों ने बड़े अकीदत व बेदारी से नातिया कलाम व शोहरा-ए-कमरा की बेहतरीन तकरीर को सुना व फैज हासिल किया।
जलसे की शुरुआत शायरे इस्लाम महमूद मंजूर लखनवी ने किया। उन्होंने दीप जब जला मेरे मुस्तफा की रहमत का, हो गया जमाने से खात्मा जेहालत का, मां के पांव को जब भी इश्क से दबाया है, रास्ता नजर आया हैं बागे जन्नत का शेर सुनाकर खूब वाहवाही लूटा। मौलाना अख्तर जमाल ने हिंदू मुस्लिम तहजीब को जिंदा रखने वाला शेर पढ़ा। उनका शेर ये त्रिशूल वाले हैं, हम कुरान वाले हैं, मगर दुश्मन जहां के लिए सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान वाले हैं, सुनकर लोगों में वतनपरस्ती का जज्बा जगा दिया। गढ़वा पलामू के जियाउल्ला हुनर का शेर जो खुदा का प्यारा है, वो नबी हमारा हैं, अर्स का जो तारा हैं वो नबी हमारा है पसंद किया गया। नातिया कलाम के बाद मौलाना अख्तर रजा चतुर्वेदी ने जबरदस्त तकरीर से लोगों को झकझोर दिया। कहा कि इस्लाम सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाता है। इस्लाम में जिहाद का मतलब अपने अंदर के शैतान को मारना है न कि बेबस व निर्दोष लोगों का खून बहाना। ये हमारा धर्म नही सिखाता। बुराई के ऊपर अच्छाई की जीत का नाम इस्लाम है। वतन परस्ती हमारा ईमान है। जो सच्चा मुसलमान होगा वो वतन का गद्दार नही हो सकता। जलसे प्रयागराज से आये हलचल गुलशेर ने हम वफादारों को जब जब आवाज देंगी सरहदें, देखना घर से बच्चा बच्चा निकलकर आएगा शेर पढ़ा। जलसे में मौलना मुफ्ती मुजाहिदीन ने भी शेर सुनाया। यहां बभनी मदरसा से हाफिजा मुकमल कर चुके तीन बच्चों का दस्तारबंदी की गई। जलसे बभनी मस्जिद के सदर अनवर हुसैन, पूर्व ब्लॉक प्रमुख कासिम हुसैन, बाबूराम, इकबाल अहमद, आरिफ, मुराद अली, डॉ. अजीजुद्दीनका इस्लामुदीन, अब्दुल कुद्दूस, महबूब खां समेत तमाम लोग मौजूद रहे। संचालन जमाल अख्तर ने किया।