घोरावल। तहसील क्षेत्र के धुरकरी गांव में सोनभद्र-मिर्जापुर सीमा पर बकहर नदी पर नए पुल का निर्माण करीब दो वर्ष से बंद है। ऐसे में पुराने जर्जर पुल से आवागमन करने के लिए लोग विवश हैं । पुल जर्जर होने से यहां कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है। पिछली सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए 217.23 लाख रुपये बजट वाले इस पुल का निर्माण कार्य की समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद भी काम पूरा नही हो पाया।
घोरावल क्षेत्र को मंडल मुख्यालय मिर्जापुर से जोड़ने वाले मार्ग पर धुरकरी गांव में बकहर नदी बहती है। सोनभद्र मिर्जापुर की सीमा पर बहने वाली बकहर नदी पर अंग्रेजों के जमाने के बने पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। अंतरराज्यीय और अंतर्जनपदीय महत्व के इस पुल का रेलिंग कई स्थानों पर टूटा पड़ा है तो पुल निर्माण में लगे पत्थर कई जगह उखड़ गए हैं और पुल कभी भी धराशायी हो सकता है। यूपी सरकार के तत्कालीन विशेष सचिव डॉ. रोशन जैकब ने इस संबंध में 18 नवंबर 2016 को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर बताया कि राज्य योजना (सामान्य) के अंतर्गत बकहर नदी पर लघु सेतु का निर्माण करने के लिए विभागीय प्रायोजना रचना एवं मूल्यांकन समिति द्वारा आंकलित लागत 217.23 लाख रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। बकहर नदी पर लघु सेतु निर्माण हेतु प्रथम किश्त के रूप में 54 लाख रुपए की धनराशि शासन द्वारा अवमुक्त की गई। इसके बाद नए पुल का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ और पांच खंभों का निर्माण हो गया। इसी बीच 2017 में हुए चुनावों में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया और पुल का निर्माण कार्य अधर में लटक गया।
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अंग्रेजों के जमाने के बने पुल से करते हैं सफर
घोरावल। क्षेत्र के रामानंद पांडे, भूपचंद्र अग्रहरि, किशोर मिश्रा, सफेदलाल बैसवार, राहुल पांडे, दिनेश मिश्रा इत्यादि का कहना है कि पिछले दो वर्ष से पुल निर्माण का कार्य ठप पड़ा हुआ है। लिहाजा लोगों को अंग्रेजों के जमाने के पुराने और काफी जर्जर हो चुके पुल से आवागमन करना पड़ता है और इस पुल पर से गुजरते समय डर लगता है। व्यस्त व्यवसायिक क्षेत्र होने से सैकड़ों बड़ी छोटी गाड़ियां इस पर से गुजरती हैं और यह पुल कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इस पुल का निर्माण कार्य मजाक बनकर रह गया है। बरसात में यह पुल पानी में डूब जाता है। इस पुल के बन जाने से मध्यप्रदेश और आस पास के जनपदों के लोगों को लाभ मिलेगा। डीएम और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए क्षेत्रीय लोगों ने जल्द से जल्द पुल निर्माण पूर्ण किए जाने की मांग की है।
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बारिश में पुराने पुल के उपर से बहता है पानी
घोरावल। दो महीने बाद शिवद्वार की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा प्रारंभ होने वाली है और लाखों कांवड़िए इस पुल से होकर शिवद्वार पहुंचते हैं। बरसात के महीनों में इस जर्जर पुल पर कई फीट पानी चलने लगता है, जो शिवद्वार की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा के लिए खतरनाक है।लाखों की संख्या में कांवड़िए मिर्जापुर गंगा नदी से पवित्र जल लेकर इसी पुल से होकर गुजरते हैं।इसी दौरान भारी बारिश होने पर दौरान पुल पर दस फीट तक पानी चलने लगता है।ऐसी स्थिति में कांवड़िए या तो पानी में उतरकर पुल पार करते हैं अथवा अन्य वैकल्पिक मार्ग से होकर दस किलोमीटर तक अधिक यात्रा करनी पड़ती है।वाहनों को भी राजगढ़ होते हुए तीस किलोमीटर अधिक यात्रा करनी पड़ती है।करीब 15 वर्ष पूर्व मिर्जापुर से जलाभिषेक करने आ रहे दो कांवड़िए पानी में डूबे पुल को पार करते समय नदी में बह गए थे और उनकी मौत हो गई थी।