सोनभद्र। धान की नर्सरी डालने का समय करीब आ गया है। किसानों ने नर्सरी डालने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। लेकिन सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोडने के लिए अभी तक रोस्टर तक नहीं बन सका है। जिले की मुख्य घाघर मुख्य नहर, शाहगंज राजवाहा समेत अन्य नहरें कई जगहों पर टूटी हुई है। इस नाते टेल तक पानी नही पहुंच पाता है। हालांकि मिर्जापुर कैनाल डिविजन का दावा है कि बारिश के पूर्व नहरों की मरम्मत करा दी जाएगी।
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कृषि निदेशालय ने जिले में इस बार खेती की रकबा को कम कर दिया है। खरीफ के सीजन में करीब 80 हजार 24 हेक्टेयर में खेती की जानी है। जबकि वर्ष 2018 में 85572 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 15 जून से धान की नर्सरी डालने का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके मद्देनजर किसानों ने तैयारियां तेज कर दी है। लेकिन अभी तक धंधरौल बांध से निकली घाघर मुख्य नहर, सोन पंप कैनाल से निकलने वाली नहर, शाहगंज राजवाहा समेत अन्य नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। आने वाले दिनों में अगर पानी छोड़ा भी गया तो टेल तक पहुंचना मुश्किल होगा। क्योंकि जगह-जगह नहरें टूटी हुई है। यही हाल मानपुर, लोढ़ी समेत अन्य माइनरों की है। शाहगंज रजवाहा में रिमॉडलिंग के नाम पर अब तक सिर्फ कोरम पूरा किया गया। इसका पानी अभी भी टेल तक पहुंचते-पहुंचते अंतिम सांस तोड़ देता है। इसके अलावा तमाम जगहों पर यह रजवाहा क्षतिग्रस्त है। जिससे ओवरफ्लो होने से बड़ी मात्रा में पानी बेकार चला जाता है। मुड़िलाडीह लिफ्ट कैनाल, धरसड़ा लिफ्ट कैनाल, कुसुम्हा लिफ्ट कैनाल, सोन लिफ्ट कैनाल, वीरकला बंधी निर्माण, सिलहटा बंधी निर्माण, रैया बंधी निर्माण समेत तमाम सिंचाई परियोजनाएं, छोटी बंधियों एवं अन्य दूसरी परियोजनाओं से निकलने वाली नहरों/माइनरों की हालत दयनीय है। जबकि इनकी मरम्मत के लिए पूर्व में कई बार किसान जिला प्रशासन से मांग कर चुके हैं। लेकिन अभी समस्याएं जस की जस है। इस संबंध में मिर्जापुर कैनाल डिविजन एक्सईएन राजकुमार वर्न का कहना है कि बारिश के पूर्व नहरों और माइनरों में जहां पर मरम्मत कराने की जरूरत होगी वहां करवाया जाएगा। ताकि टेल तक पानी पहुंच सकेत्र्ं। पानी की उपलब्धता के अनुसार नहरों में छोड़ा जाएगा, ताकि किसान धान की नर्सरी डाल सकें। लेकिन अभी नहरों में पानी छोडने के लिए रोस्टर नहीं बा है।
---------------
इनसेट
बारिश के पानी पर निर्भर है किसान
घोरावल। कृषि प्रधान क्षेत्र घोरावल आज अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है। खेती किसानी यहां रोजी रोटी का मुख्य साधन है। इलाके के करीब 80 प्रतिश परिवार प्रत्यक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर हैं। बावजूद इसके सिंचाई के लिए किसान बरसात के पानी पर निर्भर रहते हैं।क्षेत्र में सिंचाई के लिए बने नहरों में घाघर मुख्य कैनाल (जीएमसी) प्रमुख है, जिसका श्रोत धंधरौल बांध है। घाघर मेन कैनाल की दो शाखाएं है, पहला घोरावल रजवाहा और दूसरा शाहगंज रजवाहा। घोरावल रजवाहा से जुड़ी नहरों में दो महीने पहले पानी छोड़ा गया था और इसके बाद से नहर सूखे पड़े हैं। बेलन नदी से जुड़ी धोवा पंप नहर प्रणाली इलाके की एक प्रमुख नहर है, लेकिन बेलन नदी में पानी नही होने से यह भी किसानों के लिए किसी काम का नही है।
-----------------
इनसेट
मुड़िलाडीह लिफ्ट कैनाल का नहीं हुआ निर्माण
सोनभद्र। मुड़िलाडीह लिफ्ट कैनाल का दो बार शिलान्यास हो चुका है। लेकिन अभी तक बन नहीं सका। धरसड़ा लिफ्ट कैनाल का कोई अता-पता नही है। बेलन नदी में पानी न होने से कुसुम्हा लिफ्ट कैनाल बेकार पड़ा है। सरकार से रैया बंधी, रैपुरी बंधी के निर्माण के लिए बजट जारी होने के बाद से बंधियो का निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। कार्य कब तक पूर्ण होगा, कहना मुश्किल है। वीरकला बंधी का निर्माण कार्य अधर में है। इसके साथ ही 2015 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2020 तक हर खेत में पानी पंहुचाने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को को प्राप्त करने में इन सिंचाई परियोजनाओं की अहम भूमिका है, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं के दुर्दशा अथवा निर्माण न होने से लक्ष्य प्राप्त करना असंभव दिख रहा है।
----------------
इनसेट
सरकारी धन का किया जाता है बंदरबाट
फोटो 08 से 12 पी
सोनभद्र। जनपद की अधिकांश नहरें जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। यह कहना किसानों का है। खैराही गांव निवासी किसान बालचंद्र और बराक के रहने वालमे नागेश्वर सिंह कहते है कि स्थानीय किसानों द्वारा नहर में बेड़ा लगाकर पानी रोक कर नहर काट दी गई है। मडरा गांव निवासी अमरेश पाठक और अदलगंज निवासी राजनारायण का कहना है कि गर्मी के दिनों में नहरों की मरम्मत होती तो समस्या का समाधान हो सकता है। बारिश के दिनो में नहर की मरम्मत सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सिमट कर रह जाता है। कागजों पर मरम्मत दिखाकर सरकारी धन का बंदरबाट भी किया जाता है। बरइल गांव निवासी मंगल का कहना है कि सिंचाई विभाग द्वारा टूटी नहरंो की जांच कराकर मरम्मत कार्य कराया जाना चाहिए। सरकार द्वारा संचालित योजना में नहर मरम्मत का प्रस्ताव भी रहता है।