सोनभद्र। पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में हर साल लाखों पौधे रोपे जाते हैं। उनका रख-रखाव सही तरीके से होता है कि नहीं? कितने पौधे बचे, कितने सूख गए.. इसका आंकड़ा शायद ही रखा जाता है। इस बार भी अभी तक पिछले वर्ष के पौधरोपण की सत्यापन रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। हालांकि पिछले साल के पौधरोपण को ही ध्यान में रखते हुए, इस बार ढाई गुना अधिक 30.62 लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित कर लिया गया है।
कभी जिले के दो तिहाई से अधिक हिस्सा पेड़ों से आच्छादित था लेकिन अब यह एक तिहाई के करीब आ गया था। इसको देखते हुए यहां हर साल लाखों पौधे रोपे जाते हैं। एक दिन में सर्वाधिक पौधरोपण का रिकार्ड भी बनाया जा चुका है लेकिन इसके रख-रखाव और सत्यापन को लेकर बरती जा रही उदासीनता के चलते बहुत कुछ सुधार नहीं दिख पा रहा है। उधर, डीएफओ सोनभद्र वन प्रभाग एसके सिंह का कहना है कि पिछले वर्ष 18 लाख पौधे रोपे गए थे। उसमें कितने सूख गए, कितने बचे, इसके लिए विभिन्न विभागों से सत्यापन करवाया गया था लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। हालांकि इस वर्ष ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण हो इसके लिए तीस लाख 62 हजार पौधरोपण का लक्ष्य तय किया गया है। बरसात होते ही पौधों के रोपण का काम शुरू कर दिया जाएगा।