रेणुकूट। गर्मी की आहट के साथ ही नगर परिक्षेत्र में पेयजल की समस्या गहराने लगी है। वैसे इलाके में पूरे वर्ष पानी का किल्लत बना रहता है। भौगोलिक स्थिति और घनी आबादी की वजह से बोरिंग और हैंडपंपों की संख्या काफी कम है। पानी के लिए नगर पंचायत ने लाखों रुपये खर्च कर दिये लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। हालांकि कुछ वर्षों में निजी सबमर्सिबल पंपों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां की अधिकतर आबादी औद्योगिक परियोजना की कॉलोनी और रेणुकूट नगर पंचायत में निवास करती है। परियोजना आवासीय परिसर में तो व्यवस्थित तरीके से घर-घर में नल के कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि नगर पंचायत एरिया में स्थिति बिल्कुल अलग है। औद्योगिक परियोजनाओं के स्थापना काल के समय में कंपनी द्वारा परियोजना कॉलोनी के अलावा बाहरी इलाकों में जगह-जगह नल कनेक्शन देकर पानी की व्यवस्था किया गया था। धीरे-धीरे आबादी बढ़ने के कारण नलों की संख्या जनसंख्या के लिहाज से कम हो गई। शासन द्वारा नगर के सर्वांगीण विकास के लिए औद्योगिक इकाइयों को पृथक कर सन 1995 में रेणुकूट नगर पंचायत का गठन किया गया। प्रथम कार्यकाल में सैकड़ों हैंडपंप लगाए गए लेकिन कुछ ही महीनों में परिसीमन विवाद को लेकर इलाके में हो रहे विकास कार्य को रोक दिया गया। पुन: नए परिसीमन के आधार पर सन 2008 में नगर पंचायत का चुनाव हुआ। पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए तब से अब तक नपं प्रशासन ने इस इलाके में कई दर्जन सबमर्सिबल पंपों को लगवाया लेकिन पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गये। गली-गली में लगाए गये इन पंपों पर दिन-दिन भर पानी बहने के कारण बीते आठ वर्षों में भूगर्भ जलस्तर तेजी से खिसक गया। एक दशक पूर्व जहां डेढ़ से दो सौ फीट की गहराई में ही पर्याप्त पानी का स्रोत मिल जाता था। अब साढ़े तीन सौ से चार सौ की गहराई तक बोरिंग के बावजूद भी काम चलाऊ पानी का स्रोत मिल पा रहा है। हालत यह है कि बीते दस वर्षों में पानी की समस्या को दूर करने के लिए नगर पंचायत ने लाखों रुपए खर्च कर दिए लेकिन समस्या खत्म होने की वजह बढ़ता गया। पांच दशक पूर्व औद्योगिक परियोजना द्वारा लगाए गए नलों पर ही नगर पंचायत एरिया के लोग आज भी निर्भर हैं।
पंचायत चुनाव में पेयजल था प्रमुख मुद्दा
रेणुकूट। सन 2017 में हुए निकाय चुनाव में पेयजल मुख्य चुनावी मुद्दों में से एक था। प्रत्याशियों ने अपने घोषणा पत्र सहित भाषणों में जोर देकर पानी की समस्या को दूर करने का वादा किया था। किसी प्लानिंग के बिना धन खर्च कर लगाए गये सबमर्सिबल पंपों से पानी की बर्बादी रोकने के लिए योजना बनाकर घर घर कनेक्शन देने का वादा आज भी चुनावी मुद्दा ही नजर आ रहा है।
जल संरक्षण के लिए जागरुकता जरुरी
रेणुकूट। अधिशासी अधिकारी प्रद्युम्न कुमार ने कहा कि भूगर्भ जल संरक्षण को लेकर पंचायत प्रशासन गंभीर है इसके लिए वह लोग दोनों तरह का प्रयास करते हैं। कुछ महीनों में पंचायत परिक्षेत्र में युद्ध स्तर पर पौधरोपण कराया गया वहीं प्राकृतिक झरनों एवं कुओं के साफ सफाई व संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वार्ड नंबर एक के गांधीनगर में प्राकृतिक झरने के समीप कुंड की स्थापना कर जल संचय किया जा रहा है जिससे भूगर्भ जल स्तर में सुधार हो और आसपास के लोगों को पानी भी सुलभता से मिल सके। उन्होंने बताया कि पंचायत क्षेत्र में लगभग दो सौ हैंडपंप व सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं। पंपों को चालू और बंद करने के लिए मोबाइल चिप सिस्टम का भी उपयोग किया जाता है। भौगोलिक स्थिति और सघन आबादी होने के कारण जल संरक्षण पर प्रभावी कदम उठाने में दिक्कतें आती हैं। पानी की समस्या को देखते हुए 6 जगहों पर कंक्रीट की पक्की टंकियां बनाई जा रही हैं। इसके जरिए समय सारणी बनाकर जल आपूर्ति किया जाएगा। सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है।