परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन का स्तर बेहतर बनाने का विभाग लगातार दावा कर रहा है, मगर जिले के कई स्कूलों की व्यवस्था बदहाल है। कहीं भवन नहीं तो कहीं अन्य संसाधनों का टोटा है।
दुद्धी ब्लॉक के अमवार में संचालित संविलियन विद्यालय भी इनमें से एक है। यहां दो कमरों में आठ कक्षाएं चल रही हैं। कुल 153 बच्चों की पढ़ाई होती है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय सुंदरी में 134 बच्चे हैं। यहां भी सिर्फ दो कक्षा कक्ष हैं। हाल यह है कि एक ही कक्षा में एक तरफ ककहरा गूंजता है तो दूसरी तरफ बड़ी कक्षाओं के बच्चे गुणा-भाग सीख रहे होते हैं।
कनहर के डूब क्षेत्र में शामिल दुद्धी और बभनी ब्लॉक के 11 गांवों के विस्थापितों को अमवार के पास पुनर्वास कॉलोनी में बसाया गया है। गांव से सारा सामान समेट कर आए परिवारों के बच्चों के लिए विद्यालय बनाए गए हैं। संविलियन विद्यालय दो कमरों का है।
इसमें 153 बच्चों का नामांकन किया गया है। एक कमरे में कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है तो दूसरे में 6 से 8 तक की। पर्याप्त डेस्क-बेंच न होने से बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ते हैं। विद्यालय में कुल चार शिक्षक हैं। वह बारी-बारी अपनी कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हैं।
इसी से कुछ दूर प्राथमिक विद्यालय सुंदरी में भी 134 बच्चों का नामांकन किया गया है। यहां भी पांच कक्षाओं के लिए दो कमरे ही हैं। कार्यालय में भी कक्षा लगाई जा रही है तो कई बार बरामदे में बच्चे पढ़ते हैं। इस अव्यवस्था के बीच पढ़ाई प्रभावित है। जगह के अभाव में बच्चे विद्यालय आने से हिचकते हैं।
भटौलिया गांव के कंपोजिट विद्यालय में बरामदे में लगती है क्लास
कुछ ऐसी ही स्थित करमा ब्लॉक के भटौलिया गांव के कंपोजिट विद्यालय की भी है। यहां आठवीं तक की कक्षा तीन अतिरिक्त कक्षों में चल रही है। कुल 296 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल का भवन जर्जर हाे चुका है और उसे ढहाने का निर्देश है। ऐसे में शिक्षक अतिरिक्त कक्षा कक्ष में पढ़ाई कराते हैं। कई बार बरामदे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ती है। नवीन भवन के लिए मांग भेजी गई है, मगर मामला लंबित है।