घोरावल। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए बनी योजनाएं निरर्थक साबित हो रही हैं। पिछले चार महीनों से इन योजनाओं से ग्रामीणों इलाकों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। लोग टैंकर के पानी पर निर्भर हैं।
घोरावल क्षेत्र में पेयजल की गंभीर समस्या को देखते हुए 80 के दशक में तीन पेयजल ग्राम समूह पेयजल योजनाएं बनाई गईं। कोहरथा ग्राम समूह पेयजल योजना, इमलीपोखर ग्राम समूह पेयजल योजना और मुक्खा ग्राम समूह पेयजल योजना बनीं। इन तीनों पेयजल योजनाओं से शिवद्वार, कोहरथा, पड़वनियां, बर, कन्हरा, जानर, सिंहावल, डोरिहार, भरकना, सतद्वारी, कडिय़ा, अमिलौधा, मुक्खा, करसोता, पत्थरताल, मधका, लहास, सिरसाई, घुवास, परसौना, इमलीपोखर, सपही, मूर्तियां, बभनी समेत कई दर्जन गांव जुड़े हुए थे। योजनाएं स्थापित होने के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक तो ठीक चलीं, लेकिन इधर कई वर्षों से बदहाली का शिकार हो चुकी हैं। पिछले करीब चार महीनों से ये योजनाएं पूरी तरह बंद हैं और ग्रामीणों को एक बूंद पानी भी नहीं मिल पा रहा है। इस वर्ष बारिश कम होने से जल स्तर बहुत नीचे चला गया। बेलन नदी का पानी पूरी तरह सूख जाने से पेयजलापूर्ति पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। कोहरथा के ग्राम प्रधान हनुमान प्रसाद बैसवार, कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि इन पेयजल योजनाओं के लिए बेलन नदी से लिफ्ट कर पानी उठाया जाता था। बेलन नदी में पानी नहीं होने पर पर घोरावल रजवाहा से बेलन में आने वाले पानी द्वारा इन योजनाओं को पानी दिया जाता था। लेकिन इस वक्त न तो बेलन में पानी है और न ही रजवाहा से पानी आ रहा है। पेयजल के लिए टैंकरों से जलापूर्ति ही एक मात्र सहारा है।
जल स्रोत सूखने से पेयजल परियोजनाओं से आपूर्ति संभव नहीं
घोरावल। जल निगम के अधिशासी अभियंता फणींद्र राय का कहना है कि इन योजनाओं को बेलन नदी से पानी की आपूर्ति की जाती है। जल स्रोत सूखने से योजनाओं से जुड़े गांवों को जलापूर्ति संभव नहीं हो पा रहा है। बरसात के बाद जैसे ही बेलन में पानी भरेगा, इन योजनाओं के जरिए संबंधित ग्रामीण इलाकों को जलापूर्ति होने लगेगी।