सोनभद्र। शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने से इंकार कर दिया है। सिर्फ उन्हीं गांवों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्देश दिया है। जिन गांवों में 50 प्रतिशत से कम खेती हुई है या 33 प्रतिशत फसल नुकसान हो गया है, उनको ही सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा। एडीएम उमाकांत त्रिपाठी ने तीनों तहसील के एसडीएम को राजस्व कर्मियों के माध्यम से सूखाग्रस्त की श्रेणी में आने वाले गांवों का चयन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
जिले का अधिकांश क्षेत्रफल जंगलों एवं पहाड़ों से आच्छादित है। यहां की खेती-बारी बारिश पर आधारित है। कृषि विभाग की मानें तो वर्ष 2017-18 में जरूरत के अनुसार बारिश न होने के कारण अधिकांश गांवों में 50 प्रतिशत से कम खेती हुई है। वहीं सिंचाई के अभाव में कई गांवों में फसल सूख गई। इसको गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए रिपोर्ट भेजा था। लेकिन फिलहाल शासन ने संपूर्ण जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने से इंकार कर दिया है। शासन जिला प्रशासन को सूखे के दायरे में आने वाले गांवों को ही सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए रिपोर्ट मांगी है। पिछले सप्ताह लखनऊ की तीन सदस्यीय टीम ने जिले के कुछ गांवों का दौरा कर रिपोर्ट भी तैयार कर ले गई। यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने दी। एडीएम उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि शासन ने जिन गांवों मेें 50 प्रतिशत से कम खेती हुई है और जिन गांवों में 33 प्रतिशत फसल बर्बाद हुआ है उनको सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया है। कहा कि राबर्ट्सगंज, घोरावल और दुद्धी एसडीएम को शासन की ओर निर्धारित मानकों के दायरे में आने वाले गांवों को चयनित करने का निर्देश दे दिया गया है। जल्द से जल्द गांवों की सूची तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। ताकि अविलंब सूखे से पीड़ित किसानों को मुआवजा मिल सके।