प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले के दौरान जिले की सड़कों से होकर गुजर रहे श्रद्धालुओं के लिए सफर जानलेवा साबित हुआ है। पिछले एक माह में अलग-अलग स्थानों पर हुए सड़क हादसों में 15 श्रद्धालुओं ने जान गंवाई है, जबकि 40 से अधिक घायल भी हुए हैं।
महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ हुई थी। करीब 144 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग में हो रहे इस महाकुंभ के दौरान पवित्र संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु उत्साहित हैं। देश-दुनिया के कोने-कोने से लोग महाकुंभ पहुंच रहे हैं।
ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, बंगाल सहित कई अन्य राज्यों के श्रद्धालु सोनभद्र के रास्ते सफर कर रहे हैं। पिछले एक माह के दौरान जिले की सड़कों पर महाकुंभ आने-जाने के दौरान अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों में 15 श्रद्धालुओं ने जान गंवाई है।
यह हादसे वाराणसी-शक्तिनगर और मुर्धवा-बभनी मुख्य मार्ग पर हुए हैं। ज्यादातर हादसों का वक्त भी अलसुबह या देर रात का रहा है, जब वाहन में सवार लोग गहरी नींद में रहे। लंबी व थकान भरी यात्रा और तेज रफ्तार हादसों की वजह बनी है।
यह हुए प्रमुख हादसे
गत दो फरवरी को हाथीनाला के रानीताली गांव के पास बेकाबू ट्रेलर डिवाइडर तोड़कर दूसरे लेन में चला गया। सामने से आ रही कार उससे टकरा गई। इस हादसे में कार सवार पांच समेत सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हुए थे।
चोपन के प्रीतनगर में 31 जनवरी को महाकुंभ से लौट रहे श्रद्धालुओं की कार टायर फटने से अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में चालक सहित दो लोगों की मौत हुई, जबकि सात लोग घायल हुए थे।
बभनी के दरनखाड़ के पास अंबिकापुर मार्ग पर श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो और ट्रेलर में टक्कर हो गई। इस हादसे में बोलेरो सवार चार लोगों की मौत हुई। इसी दिन बभनी क्षेत्र में ही दो बसों की टक्कर में ओडिशा की रहने वाली महिला श्रद्धालु ने जान गंवाई।
13 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के कांग्रेस विधायक इंद्रकुमार का वाहन महाकुंभ जाते समय म्योरपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विधायक समेत उनके परिवार के आठ लोग घायल हुए थे।
हाईवे पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए जगह-जगह संकेतक व अन्य सुरक्षात्मक बोर्ड लगाए गए हैं। ज्यादातर हादसों के पीछे नियमों की अनदेखी वजह रही है। इसमें कमी लाने के लिए नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।
-धनबीर यादव, एआरटीओ।